भोपाल। आचार्य विद्यासागर महाराज की 58वीं दीक्षा तिथि पर श्रद्धा और संकल्प का संगम देखने को मिला। मुनि श्री प्रमाण सागर ने इस अवसर पर चार सूत्रीय संकल्प जैन बनाओ, बढ़ाओ, बचाओ, बसाओ प्रस्तुत करते हुए कहा कि अब समय है कि गुरुदेव की प्रेरणा को जीवन में उतारें। उन्होंने गुरुदेव के व्यक्तित्व को पंचतत्वों से युक्त दिव्य साधक बताया, जिनमें क्षमा, शीतलता, तप, निर्विकल्पता और व्यापकता समाहित थी।
मुनि श्री ने कहा कि दीप सीमित प्रकाश देता है, पर आचार्यश्री जैसे आत्मसूर्य का आलोक युगों तक राह दिखाता है। गुरु की भक्ति उनकी आरती नहीं, बल्कि उनके संकल्पों की पूर्ति है। इस मौके पर श्री विद्याप्रमाण गुरुकुलम् को अंतरराष्ट्रीय जैन विश्वविद्यालय के रूप में विकसित करने की घोषणा की गई। मुनि संघ का चातुर्मास इसी गुरुकुल में होगा, जिसकी कलश स्थापना 13 जुलाई को होगी।सभा का समापन भावपूर्ण कविता और “जहाँ गुरुदेव, वहीं हम” के संकल्प के साथ हुआ।
