नयी दिल्ली, 30 जून (वार्ता) पश्चिम बंगाल के कोलकाता में विधि प्रथम वर्ष की एक छात्रा से कथित सामूहिक दुष्कर्म मामले का स्वतः संज्ञान लेने और इसे केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपने की गुहार उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश बी आर गवई से की गई है।
ये गुहार अधिवक्ता सत्यम सिंह राजपूत ने पत्र याचिका के जरिए लगाई है। पत्र में अनुरोध किया गया है कि वह 25 जून को दक्षिण कोलकाता विधि कॉलेज परिसर में 24 वर्षीय विधि छात्रा के साथ हुए ‘क्रूर सामूहिक बलात्कार’ का स्वतः संज्ञान लें। साथ ही, स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच के लिए इसे सीबीआई को सौंपन का आदेश दिया जाए।
अधिवक्ता राजपूत ने मुख्य न्यायाधीश से ‘तत्काल न्यायिक हस्तक्षेप’ का अनुरोध किया है। उन्होंने पीड़िता को कथित तौर पर ‘दोषी ठहराने और शर्मिंदा करने’ वाली असंवेदनशील टिप्पणियों के लिए तृणमूल कांग्रेस सांसद कल्याण बनर्जी और विधायक मदन मित्रा के खिलाफ कार्रवाई की भी मांग की है।
अधिवक्ता ने मामले में तत्काल न्यायिक हस्तक्षेप और राजनीतिक प्रभाव से मुक्त निष्पक्ष समयबद्ध जांच सुनिश्चित करने के लिए अदालत की निगरानी में सीबीआई जांच निर्देश देने की गुहार लगाई है।
उनकी पत्र याचिका में कहा गया है, “पीड़िता, उसके परिवार, गवाहों और कानूनी प्रतिनिधियों को तत्काल सुरक्षा प्रदान की जानी चाहिए। शैक्षणिक संस्थानों में अनिवार्य सीसीटीवी निगरानी, महिला सुरक्षा प्रकोष्ठ और नियमित सुरक्षा ऑडिट सहित व्यापक सुरक्षा उपाय किए जाएं। पीड़िता के चिकित्सा उपचार, पुनर्वास और कानूनी खर्चों के लिए 50 लाख रुपये का अंतरिम मुआवजा दिया जाना चाहिए।”
श्री राजपूत ने अपनी पत्र याचिका में पीड़िता को बदनाम करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की भी मांग की है।
