रथ यात्रा के इतिहास में गुंडिचा मंदिर में पहली बार भगदड़ में श्रद्धालुओं की मौत

पुरी, 29 जून (वार्ता) ओडिशा के पुरी में भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा के दौरान रविवार तड़के सारधाबली में गुंडिचा मंदिर के पास भगदड़ मचने का यह पहला मामला है जब इस तरह की घटना में किसी श्रद्धालु की जान गयी है।

गौरतलब है कि इस हादसे में तीन श्रद्धालुओं की मौत हो गयी और सात अन्य घायल हो गए।

इससे पहले 2008, 2012 और 2015 के दौरान पुरी रथ यात्रा में भगदड़ में भक्तों की मौत हो चुकी है, लेकिन गुंडिचा मंदिर के पास श्री जगन्नाथ मंदिर की नौ दिवसीय यात्रा में ऐसी भगदड़ कभी नहीं हुयी थी। राज्य सरकार और जिला प्रशासन ने इस त्रासदी के लिए भगवान जगन्नाथ के दर्शन के लिए उमड़ी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को जिम्मेदार ठहराया है।

पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) वाई.बी खुरानिया ने घटनास्थल का निरीक्षण करने के बाद इस घटना का कारण भक्तों द्वारा अपने मोबाइल फोन से सेल्फी और फोटो लेने को बताया।

ओडिशा के लोग तीन श्रद्वालुओं की मौत से सदमे में हैं। घायल सात लोगों का इलाज जिला मुख्यालय अस्पताल में चल रहा है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार गुंडिचा मंदिर के पास बड़ी संख्या में श्रद्धालु जमा थे। हर घंटे सैकड़ों लोग भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा को देखने पुरी पहुंच रहे थे। रात करीब 12:40 बजे पारंपरिक ‘पहुंदी’ अनुष्ठान के साथ दर्शन बंद होने तक स्थिति शांतिपूर्ण रही। मूर्तियों को पर्दे से ढक दिया गया। गुंडिचा मंदिर में दर्शन के लिए इंतजार कर रहे कई भक्तों को मंदिर बंद होने के बारे में पता नहीं था और वे रथों के पास इंतजार करते रहे। सुबह करीब चार बजे पर्दे हटाए गए और पुजारियों ने मंगल आरती से देवताओं की दैनिक रस्में शुरू कीं। आरती की घंटियों की आवाज सुनकर समारोह देखने के लिए भारी भीड़ रथों की ओर दौड़ पड़ी। उसी समय दो ट्रकों ने भीड़भाड़ वाले क्षेत्र में आकर पहांडी अनुष्ठान के लिए इस्तेमाल की जाने वाली सीढ़ी के हिस्सों को उतार दिया, जो देवताओं को मंदिर में ले जाने में मदद करती हैं। सीमित स्थान होने के कारण ट्रकों ने रथों के पास सीढ़ियाँ उतार दीं और भीड़ बढ़ने पर कम से कम 15 भक्त सीढ़ियों के ढेर से टकरा गए और कुचले गए।

प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि घटनास्थल पर वरिष्ठ या जिम्मेदार अधिकारी नहीं थे। केवल कुछ कांस्टेबल मौजूद थे और पास के प्राथमिक चिकित्सा पोस्ट पर कोई एम्बुलेंस या मेडिकल टीम उपलब्ध नहीं थी। मृतकों में से एक के पति ने मीडिया को बताया कि वह एक घंटे से अधिक समय तक मदद के लिए रोता रहा, तब जाकर एम्बुलेंस आयी। जब तक वे अस्पताल पहुँचे, तब तक दो व्यक्ति पहले ही मर चुके थे और तीसरे की कुछ ही देर बाद मृत्यु हो गयी। घटनाओं की प्रारंभिक समीक्षा से गंभीर प्रशासनिक चूक का पता चलता है। मंदिर के अनुष्ठान रिकॉर्ड के अनुसार, 27 जून की रात को पाहुदा अनुष्ठान नहीं किया गया था। वहीं, 28 जून को पुजारियों ने अप्रत्याशित रूप से दर्शन बंद कर दिए, जिससे भक्तों को भगवान जगन्नाथ के दर्शन करने का अवसर नहीं मिल पाया। इससे भीड़ बेकाबू हो गई, जिससे पुजारियों और मंदिर प्रशासन के बीच समन्वय की स्पष्ट कमी सामने आयी। पाहुदा अनुष्ठान के बिना दर्शन जारी रखने से भीड़ को बेहतर ढंग से प्रबंधित करने में मदद मिल सकती थी। स्थापित मानदंडों के अनुसार, पाहुदा केवल मुख्य प्रशासक की स्वीकृति से ही किया जा सकता है। एक विवादास्पद कदम के तहत प्रशासन ने गुंडिचा मंदिर के सौंदर्यीकरण की आड़ में पूरे सारधाबली क्षेत्र में बैरिकेडिंग कर दी। पहले इस क्षेत्र को परंपरागत रूप से संतों, साधुओं और तीर्थयात्रियों द्वारा विश्राम के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इससे कई लोगों को रात भर मंदिर के सामने शरण लेनी पड़ी, जिससे भीड़ और बढ़ गयी।

प्रशासन ने रथ यात्रा के पहले दिन 15 लाख से ज़्यादा श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद जतायी थी। उपमुख्यमंत्री पार्वती परिदा की अगुआई में विधि, स्वास्थ्य और परिवहन मंत्रियों सहित एक मंत्रिस्तरीय समिति को तैयारियों की देखरेख का काम सौंपा गया था। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने पहले जनता को आश्वासन दिया था कि इस साल की रथ यात्रा को दुर्घटना-मुक्त बनाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।

सुरक्षा योजनाओं में 10,000 पुलिस कर्मियों, एनएसजी कमांडो, रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ), ओडिशा आपदा त्वरित कार्रवाई बल (ओडीआरएएफ), राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया मोचन (एनडीआरएफ) टीमों, ड्रोन-रोधी और तोड़फोड़-रोधी दस्तों, बम निरोधक इकाइयों, डॉग स्क्वॉड और नौसेना, तटरक्षक बल और समुद्री पुलिस द्वारा निगरानी की तैनाती शामिल थी। बड़दंडा समेत प्रमुख स्थानों और पुरी को भुवनेश्वर, कोणार्क और ब्रह्मगिरी से जोड़ने वाले मार्गों पर एआई-संचालित सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे। निगरानी के लिए ड्रोन और हेलीकॉप्टर का भी इस्तेमाल किया जाना था।

अब इन कृत्रिम बुद्धि (एआई)-सक्षम कैमरों की कार्यप्रणाली और नियंत्रण केंद्र की निगरानी करने वाले अधिकारियों द्वारा वास्तविक समय में प्राप्त इनपुट के आधार पर कार्रवाई किए जाने के बारे में सवाल उठाए जा रहे हैं। भीड़ नियंत्रण प्रोटोकॉल के सख्त होने के दावों के बावजूद आज की घटनाएं भीड़ प्रबंधन में एक महत्वपूर्ण विफलता की ओर इशारा करती हैं। नाम न बताने की शर्त पर एक सेवानिवृत्त वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि प्रशासन का ध्यान रथ यात्रा के पहले दिन संध्या दर्शन, बाहुदा और सुनावेश पर केंद्रित होता है। एक बार जब रथ गुंडिचा मंदिर पहुँच जाते हैं, तो ऐसा लगता है कि वे लापरवाह हो जाते हैं। थके हुए सुरक्षाकर्मियों को बाहर नहीं निकाला गया और ऐसा लग रहा था कि ज़िम्मेदारियों को संभालने के लिए कोई बैकअप बल नहीं था। इसके अलावा जहाँ कथित तौर पर उद्घाटन के दिन दस लाख से अधिक लोगों ने भाग लिया। वहीं लगभग उतने ही लोग अगले दिन दर्शन के लिए मौजूद थे।

मुख्यमंत्री माझी ने प्रत्येक मृतक के परिजनों को 25-25 लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की है। बीमा योजना के तहत अतिरिक्त पांच लाख रुपए दिए जाएंगे। शवों को परिजनों को सौंप दिया गया है। बताया जा रहा है कि प्रशासन की ओर से कोई भी वरिष्ठ अधिकारी शोक संतप्त परिवारों से मिलने अस्पताल नहीं पहुंचा। इसके बाद राज्य सरकार ने पुरी के जिला कलेक्टर सिद्धार्थ शंकर स्वैन का तबादला कर दिया और उनकी जगह चंचल राणा को नियुक्त किया। पुलिस अधीक्षक विनीत अग्रवाल की जगह विशेष कार्य बल के महानिरीक्षक (एसटीएफ-डीआईजी) पिनाक मिश्रा को नियुक्त किया गया है। डीसीपी बिष्णु प्रसाद पति और कमांडेंट अजय परिदा को निलंबित कर दिया गया है। ओडिशा के उच्च शिक्षा सचिव अरविंद अग्रवाल को रथ यात्रा व्यवस्थाओं का समग्र प्रभारी नियुक्त किया गया है। श्री अग्रवाल पुरी के पूर्व कलेक्टर हैं। पहांडी अनुष्ठान ( जिसमें देवताओं को गुंडिचा मंदिर में ले जाया जाता है) आज शाम 5:30 बजे निर्धारित है। नवनियुक्त एसपी ने भगदड़ स्थल का दौरा किया और भीड़ प्रबंधन की निगरानी शुरू कर दी। पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता अडापा पहांडी का सुचारू संचालन सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि भीड़ नियंत्रण उपायों को कारगर बनाने के लिए वे अपने पिछले अनुभवों का लाभ उठाएंगे।

Next Post

चलता ट्रक आग का गोला बन गया, लाखों का नुकसान

Sun Jun 29 , 2025
ग्वालियर। आज रात पनिहार हाईवे पर एक चलता ट्रक आग का गोला बन गया। आग लगने से ट्रक में भरा लाखों का सामान जलकर राख हो गया। ड्राइवर सुरक्षित है। पुलिस आग लगने के कारणों की जांच कर रही है। Facebook Share on X LinkedIn WhatsApp Email Copy Link

You May Like