मुंबई, 29 जून (वार्ता) इजराइल-ईरान तनाव कम होने और कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट की बदौलत हुई लिवाली से बीते सप्ताह दो प्रतिशत तक के उछाल पर रहे घरेलू शेयर बाजार की अगले सप्ताह औद्योगिक उत्पादन (आईआईपी) के साथ ही अमेरिका के गैर-कृषि पेरोल और बेरोजगारी दर जैसे प्रमुख आर्थिक आंकड़ों पर नजर रहेगी।
बीते सप्ताह बीएसई का तीस शेयरों वाला संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 1650.73 अंक अर्थात 2.00 प्रतिशत की छलांग लगाकर सप्ताहांत पर 84058.90 अंक पर पहुंच गया। इसी तरह नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी 525.4 अंक यानी 2.1 प्रतिशत उछलकर 25637.80 अंक हो गया।
समीक्षाधीन सप्ताह में बीएसई की दिग्गज कंपनियों की तरह मझौली और छाेटी कंपनियों के शेयरों में भी जमकर लिवाली हुई। इससे मिडकैप 1060.99 अंक अर्थात 2.33 प्रतिशत की तेजी लकर सप्ताहांत पर 46541.25 अंक और स्मॉलकैप 1870.88 अंक यानी 3.6 प्रतिशत की मजबूती के साथ 54249.40 अंक पर बंद हुआ।
विश्लेषकों के अनुसार, बीते सप्ताह घरेलू शेयर बाजार में जोरदार तेजी देखने को मिली। शुरुआती उतार-चढ़ाव के बाद दोनों मानक सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी मजबूती के साथ बंद हुए। मध्य-पश्चिम में भू-राजनीतिक तनाव में कमी और कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट ने बाजार की तेजी को बल दिया। इससे निवेशकों की धारणा सुधरी और लगभग सभी समूहों में व्यापक स्तर पर खरीददारी देखने को मिली। हालांकि, आईटी समूह के कमजोर प्रदर्शन ने बाजार की तेजी को थोड़ी सीमा में जरूर रखा। दरअसल, आईटी दिग्गज एक्सेंचर द्वारा आउटसोर्सिंग सौदों में मंदी का हवाला देते हुए सतर्क रुख अपनाए जाने से इस सेक्टर में दबाव रहा। इससे ग्राहकों के खर्च और मांग को लेकर चिंता बढ़ी।
दूसरी ओर, अमेरिकी फेडरल रिजर्व के कई गवर्नरों के नरम स्वर ने वैश्विक बाजारों में सकारात्मक माहौल बनाया। इससे यह संकेत मिला कि फेड मौद्रिक नीति में लचीलापन दिखा सकता है। बाजार में जुलाई की शुरुआत में संभावित ब्याज दर कटौती को लेकर अटकलें भी तेज हो गई हैं।
आगे नजर डालें तो पहली तिमाही के कॉर्पोरेट नतीजों का सीजन नजदीक है, जिसको लेकर निवेशक काफी सतर्क हैं। कारोबारी गतिविधियों और विकास के संकेत पाने के लिए बाजार की नजर कंपनियों के नतीजों पर टिकी है। इसके अलावा अमेरिका अपने प्रमुख व्यापारिक साझेदारों के साथ व्यापार समझौतों को अंतिम रूप देने जा रहा है, जिसे लेकर भी वैश्विक बाजारों में उत्सुकता बनी हुई है।
इस बीच निवेशक भारत के औद्योगिक उत्पादन के आंकड़ों के साथ-साथ अमेरिका के गैर-कृषि पेरोल और बेरोजगारी दर जैसे प्रमुख आर्थिक संकेतकों पर भी करीब से नजर रख रहे हैं। ये आंकड़े वैश्विक और घरेलू आर्थिक हालात की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।
