भोपाल. जल गंगा अभियान से भोपाल जिले में जल संरक्षण के साथ-साथ किसानों की आजीविका को भी नया आधार दिया है. ऐसा ही एक प्रेरक उदाहरण है जनपद पंचायत फंदा की ग्राम पंचायत कालापानी के किसान केगू का. केगू को लंबे समय से अपने खेतों की सिंचाई के लिए जल स्रोत की कमी का सामना करना पड़ रहा था. फसलों को पर्याप्त पानी न मिल पाने से उनकी मेहनत भी अधूरी रह जाती थी. लेकिन जल गंगा अभियान और मनरेगा योजना ने उनके जीवन की दिशा ही बदल दी. जब उन्हें इस योजना की जानकारी मिली, तो उन्होंने तुरंत आवेदन किया. शासन द्वारा उनके खेत पर 4 लाख 50 हजार रुपये की लागत से खेत तालाब स्वीकृत किया गया, जो अब बनकर तैयार है.
इस खेत तालाब से अब वर्षा का जल संग्रहित हो रहा है, जिससे केगू को सिंचाई के लिए स्थायी जल स्रोत मिल गया है. इतना ही नहीं, वे अब इस तालाब में मत्स्य पालन शुरू करने की योजना भी बना रहे हैं, जिससे उन्हें अतिरिक्त आमदनी का साधन भी मिलेगा.
जल गंगा अभियान ने न केवल प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, बल्कि किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी मजबूत कदम बढ़ाया है. खेत तालाबों के निर्माण से जहां एक ओर जलस्तर में सुधार हो रहा है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नया संबल मिल रहा है. किसान केगू की यह कहानी दर्शाती है कि जब शासन की योजनाएं सही दिशा में पहुंचती हैं, तो वे सिर्फ एक व्यक्ति नहीं, पूरे समाज की तस्वीर बदल सकती हैं. यह सफलता न केवल मनरेगा योजना की सार्थकता को प्रमाणित करती है, बल्कि जलगंगा संवर्धन अभियान की प्रभावशीलता की भी सशक्त मिसाल बन गई है.
