
इंदौर। देश में खेती की रिसर्च किसानों की देखरेख में होगी। रिसर्च खेत से शुरू होगी , न कि दिल्ली से होगी। मैं कृषि मंत्री बाद में हूं और किसान पहले। मेरी रगो में खेती बसती है। मैं आज सोयाबीन का रकबा कैसे बढ़ेगा ? इस पर किसानों, कृषि वैज्ञानिकों, देश और प्रदेश के कृषि अधिकारियों के साथ चर्चा कर समस्या का निदान ढूंढने के लिए आया हूं।
यह बात केंद्रीय कृषि और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कही। शिवराज सिंह चौहान आज खंडवा रोड स्थित भारतीय सोयाबीन अनुसंधान केन्द्र में सोयाबीन के रकबे घटने और खेती से जुड़ी समस्याओं को लेकर बैठक कर रहे थे। बैठक के बाद चौहान ने कहा कि अब इंडस्ट्री को भी खेत में आना होगा और किसानों के हिसाब से कीटनाशक और दवाइयां बनाने होंगे। आज सोयाबीन के उस बीज की खोज करना है, जिसमें सूखे में भी और ज्यादा पानी में भी फसल खराब न हो। वही हमें यलो सोयाबीन बीज से बाहर निकलना होगा । साथ ही कम समय और कम मेहनत में ज्यादा बुआई कारण वाली अत्याधुनिक मशीन का डेमो देखा। खेती में जीनोम एडिटिंग पद्धति को अपनाया जाएगा।
उन्होंने कहा कि आज देश में 34 प्रतिशत सोयाबीन का रकबा है, जो घटता जा रहा है। देश में आज 1.32 लाख करोड़ रुपए का तेल आयात किया जा रहा है। आज हम सिर्फ 18 तेल ही पैदा कर पा रहे है। खेती के लिए सीड का प्लान बनाया जाएगा, उसमें सबसे सोयाबीन फिर कपास, गन्ना और दलहन शामिल किया जाएगा।
इस दौरान कृषि मंत्री शिवराज ने ट्रैक्टर से सोयाबीन की बुआई भी की। उन्होंने बताया कि देश में किसानों ने 300 इनोवेशन किए है और कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों से इनोवेशन की जानकारी और साझा की। ट्रैक्टर पर सवार होकर शिवराज ने कहा कि मैं मंत्री बाद में , पहले किसान हूं। खेती मेरी रगो में बसती है।
इस मौके पर कृषि मंत्री ने प्रक्षेत्र संसाधन केंद्र का शिलान्यास भी किया। कार्यक्रम में महाराष्ट्र के कृषि मंत्री मानिकराव कोकाटे, प्रदेश के नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, सांसद शंकर लालवानी, विधायक मनोज पटेल सहित बड़ी संख्या में किसान, कृषि वैज्ञानिक और कृषि विभाग के देश और प्रदेश के अधिकारी मौजूद थे।
