नयी दिल्ली 25 जून (वार्ता) ईईपीसी इंडिया के अध्यक्ष पंकज चढ्ढा ने प्रस्तावित भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) में स्टील, एल्युमीनियम और ऑटो पार्ट्स जैसे क्षेत्रीय शुल्क शामिल किए जाने चाहिए क्योंकि यह इंजीनियरिंग सामान निर्यात के लिए महत्वपूर्ण है, जो देश के कुल व्यापारिक निर्यात का लगभग एक-चौथाई हिस्सा है।
श्री चढ्ढा ने मुंबई में वित्त वर्ष 2021-22 के लिए ईईपीसी इंडिया क्षेत्रीय पुरस्कार समारोह में कहा “ यदि क्षेत्रीय शुल्कों को देखे बिना बीटीए किया जाता है, तो यह इंजीनियरिंग निर्यातकों के साथ अन्याय होगा। क्षेत्रीय शुल्क भारत के निर्यात का एक महत्वपूर्ण पहलू है। हम अमेरिका को लगभग 20 अरब डॉलर से अधिक का निर्यात करता है। इसलिए वे हमें अनदेखा करके सौदा नहीं कर सकते। जब भी बीटीए की पहली किस्त पूरी हो जाएगी, हमें उम्मीद है कि क्षेत्रीय शुल्क और ऑटो कंपोनेंट शुल्क इसका हिस्सा होंगे।”
श्री चड्ढा ने उम्मीद जताई कि यूरोपीय संघ (ईयू) के साथ एक मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर कुछ महीने में हस्ताक्षर किए जा सकते हैं, यह देखते हुए कि ब्रिटेन के साथ एक व्यापार समझौते को पहले ही अंतिम रूप दिया जा चुका है और इसे प्रमुख विकसित देशों के साथ एफटीए के लिए एक टेम्पलेट के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि भारत ब्रिटेन एफटीए को अंतिम रूप दे दिया गया है, लेकिन इसके क्रियान्वयन में लगभग एक वर्ष लग सकता है। ब्रिटेन के साथ एफटीए को वहां की संसद में पारित किया जाना है और फिर आम जनता का अनुमोदन प्राप्त करने के लिए कूलिंग ऑफ अवधि है और फिर इसे पारित किया जाएगा और फिर यह लागू होगा। इसलिए अगर सब कुछ ठीक रहा तो ब्रिटेन एफटीए के लागू होने में 12 महीने लग सकता है।
श्री चड्ढा ने कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (सीबीएएम) के तहत यूरोपीय संघ द्वारा प्रस्तावित कार्बन टैक्स से भारतीय एमएसएमई के लिए तीन साल की मोहलत का सुझाव दिया, जो जनवरी 2026 में लागू होगा। उन्होंने कुछ स्टील उत्पादों पर यूरोपीय संघ द्वारा सुरक्षा शुल्क के विस्तार को भी स्वीकार्य बताया और सरकार से यूरोपीय संघ के साथ व्यापार समझौते को अंतिम रूप देते समय इसका समाधान खोजने का अनुरोध किया।
