देश को आपातकाल की याद दिलाना भाजपा का दायित्व: पात्रा

नयी दिल्ली 25 जून (वार्ता) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कांग्रेस द्वारा आपातकाल को 50 साल पुरानी घटना बता कर भूल जाने की नसीहत को खारिज करते हुए बुधवार को कहा कि विश्व की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी होने के नाते भाजपा का यह दायित्व है कि नयी पीढ़ी को इस त्रासदी से अवगत कराया जाए ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि आपातकाल जैसी भूल दोबारा न दोहराई जाये।

‘संविधान हत्या दिवस’ पर हो रही चर्चा को लेकर कांग्रेस द्वारा उठाये गए सवाल पर भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. संबित पात्रा ने संवाददाताओं से बातचीत में कांग्रेस की मानसिकता पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े किये और कहा कि आज से 50 वर्ष पहले, आज ही के दिन, आपातकाल के रूप में देश के लोकतंत्र पर सबसे बड़ा हमला हुआ था। यह उस काले अध्याय का पचासवां वर्ष है, जब तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सरकार और कांग्रेस पार्टी ने देश पर आपातकाल थोपा था। उन्होंने कहा कि स्वाभाविक रूप से, इतिहास को कभी भुलाया नहीं जाना चाहिए। इतिहास से सीख लेनी चाहिए, ताकि लोकतांत्रिक देश में वैसी गलतियां दोबारा न दोहराई जाए। इसी भावना के साथ, भाजपा आज पूरे देश में इस काले दिन को ‘संविधान हत्या दिवस’ के रूप में स्मरण कर रही है।

डॉ. पात्रा ने कहा कि कांग्रेस पार्टी द्वारा किए गए कुकृत्य को जब याद दिलाया जा रहा है, तो कांग्रेस पार्टी की बौखलाहट सामने आ रही है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने जिस तरह की भाषा में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बारे में टिप्पणी की, वह अत्यंत निंदनीय है। उन्होंने कहा, “चाहे खरगे जी हों या कांग्रेस के मीडिया प्रमुख जयराम रमेश, इन सभी को शायद आपातकाल की पीड़ा का अहसास नहीं है। कांग्रेस को शायद यह ज्ञात नहीं कि आपातकाल के दौरान एक आम हिन्दुस्तानी ने कैसी-कैसी यातनाएं सही थीं।” उन्होंने कहा कि आपातकाल के दौरान पूरा देश भय के वातावरण में डूब गया था। आपातकाल के दौरान लगभग एक लाख दस हजार लोगों को रातों-रात जेल में डाल दिए गए। कई लोगों को ऐसी यातनाएं दी गईं कि उन्होंने मृत्यु को गले लगा लिया और आज भी उन यातनाओं के झेलने वाले अनेक लोग जीवित हैं।

भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि तत्कालीन केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी लिए बिना, आधी रात को देश पर आपातकाल थोप दिया गया था। लोकतंत्र के चौथे स्तंभ प्रेस, अखबारों के प्रिंटिंग प्रेस की बिजली काट दी गई, ताकि अगली सुबह सत्य प्रकाशित ही न हो पाए। इसलिए, दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी के रूप में भाजपा का यह दायित्व बनता है कि न सिर्फ देश को, बल्कि आगामी पीढ़ियों को भी इस त्रासदी से अवगत कराया जाए। यह सुनिश्चित किया जाए कि आपातकाल जैसी भूल दोबारा न दोहराई जाये।

डॉ. पात्रा ने कहा, “आज खरगे जी द्वारा आपातकाल पर कसा गया तंज, लोकतंत्र का भी उपहास है। उनका कहना है कि यह बात तो 50 साल पुरानी हो गई, अब इसे क्यों याद किया जा रहा है? मल्लिकार्जुन खरगे खुद कहते हैं कि आजादी की लड़ाई में शामिल नहीं रहे लोग उस विषय पर बात नहीं कर सकते, तो फिर वे यह कैसे तय कर सकते हैं कि भाजपा आपातकाल पर चर्चा न करे। मल्लिकार्जुन खरगे कैसे तय कर सकते हैं कि आजादी की लड़ाई में कौन शामिल था और कौन नहीं? हर व्यक्ति के परिवार का कोई न कोई सदस्य प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से उस संघर्ष का हिस्सा रहा है। अब उन्हें बताना चाहिए कि सोनिया गांधी का परिवार कहां से आजादी की लड़ाई में लड़ रहा था? आखिर कहां से उनका परिवार इस आंदोलन का हिस्सा था?”

उन्होंने कहा कि कांग्रेस को भाजपा के इतिहास पर उंगली उठाना तो उचित लगता है, लेकिन जब भाजपा गांधी परिवार के राजनीतिक इतिहास और महत्वाकांक्षाओं पर सवाल उठाती है, तो यह उनको ड्रामा लगता है। सच यह है कि आपातकल एक व्यक्ति की व्यक्तिगत सत्ता की लालसा का परिणाम था। केवल इसलिए कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने इंदिरा गांधी जी का चुनाव रद्द कर दिया था, तो उन्होंने बिना मंत्रिमंडल की मंजूरी के देश पर आपातकाल थोप दिया ताकि सत्ता उनके हाथ से न जाए।

भाजपा प्रवक्ता ने कहा, “मल्लिकार्जुन खरगे कहते हैं आज देश में गरीबी और अमीरी के बीच खाई बढ़ गई है। भाजपा उन्हें विश्व बैंक और संयुक्त राष्ट्र की ताजा रिपोर्ट भेजेगी, जिससे उन्हें यह पता चलेगा कि आज माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में 25 करोड़ से अधिक लोग गरीबी रेखा से ऊपर उठ चुके हैं। पिछले 11 वर्षों में प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में देश में बहुत बड़ा बदलाव आया है, यह सिर्फ नारा नहीं, बल्कि जमीनी हकीकत है। इंदिरा गांधी के ‘गरीबी हटाओ’ के नारे और मोदी सरकार द्वारा किए गए कार्यों के परिणामों में जमीन-आसमान का फर्क है। इसलिए पूरे देश को आपातकाल कभी न भूलना चाहिए।”

उन्होंने कहा, “आपातकाल को हमेशा याद रखा जाना चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी परिस्थिति कभी दोबारा न पैदा हो। जहां तक कांग्रेस पार्टी का सवाल है, तो जिस पार्टी के अंदर कोई लोकतंत्र नहीं है, वो लोकतंत्र की महिमा को क्या समझेगी? कांग्रेस पार्टी बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर जी जैसी विभूतियों के चित्रों के सामने पांव रखने वाली पार्टियों से समर्थन लेती है, उनसे संविधान का पाठ सुनना भी एक विडंबना है। पहले ये इंडी गठबंधन वाले आपस में यह तय कर लें कि इमरजेंसी पर उनकी सोच क्या है, उसके बाद भाजपा पर प्रश्न करें।”

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