श्रीनगर 24 जून (वार्ता) जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने मंगलवार को कहा कि राज्य का दर्जा बहाल करने के लिए जरुरी हुआ तो विधानसभा भंग करने में संकोच नहीं करेंगे।
श्री अब्दुल्ला ने उन मीडिया रिपोर्टों पर यह टिप्पणी की जिसमें संकेत दिया गया था कि केंद्र जम्मू कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल करने पर सहमत हो सकता है, लेकिन केवल इस शर्त पर कि संशोधित ढांचे के तहत नयी सरकार चुनने के लिए नए चुनाव कराए जाएं।
मुख्यमंत्री ने गुलमर्ग में संवाददाताओं से कहा , “मैंने एक अखबार में पढ़ा है कि राज्य का दर्जा बहाल किया जाएगा , लेकिन इसके लिए विधानसभा चुनाव कराने होंगे। कराओ। इसे किसने रोका? हमें अपनी (विधानसभा) सीटों की चिंता नहीं है। यह कहानी केवल इसलिए ‘प्लांट’की गयी ताकि विधायक डर जाएं।”
उन्होंने आगे कहा, “विधायकों को डराकर उन्हें यह कहने के लिए मजबूर करने के लिए ये कहानियां फैलाई जा रही हैं कि ‘नहीं, नहीं, छोड़ो, हम पांच साल इंतजार करेंगे।’ मैं स्पष्ट कर दूं कि यह राज्य का दर्जा विधायकों या किसी सरकार के लिए नहीं है। यह जम्मू-कश्मीर के लोगों के लिए है और हम विधायक इसमें बाधा नहीं बनेंगे। जिस दिन भारत सरकार राज्य का दर्जा बहाल करेगी, मैं राज्यपाल से अगले ही दिन विधानसभा भंग करने के लिए कहूंगा। हमें डराने की कोशिश मत करो। राज्य का दर्जा हमारा अधिकार है।”
एक अन्य कार्यक्रम में नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने दावा किया कि जम्मू-कश्मीर को उसकी धार्मिक पहचान के कारण राज्य का दर्जा नहीं दिया जा रहा है।
डॉ अब्दुल्ला से उनकी पहले की टिप्पणी “जम्मू कश्मीर को राज्य का दर्जा इसलिए नहीं दिया जा रहा है क्योंकि हम मुसलमान हैं” के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा “इसके अलावा और क्या कारण हो सकता है? क्या हम भारत के दुश्मन हैं? हमने भारत में शामिल होने का फैसला किया, जबकि पाकिस्तान हमारे ठीक बगल में था।”
डॉ अब्दुल्ला ने हाल ही में जम्मू कश्मीर के राज्य का दर्जा बहाल करने में विलंब के खिलाफ उच्चतम न्यायालय जाने की धमकी दी थी।
