
इंदौर. देश में पर्यावरण संरक्षण, वायु गुणवत्ता सुधार और जल संचयन में इंदौर की विशेष पहचान है. यह देश का मॉडल शहर बन गया है. इस शहर में विगत कई वर्षों से कई उल्लेखनीय कार्य और नवाचार हो रहे हैं. उक्त कार्यों को और आगे बढ़ाने की जरूरत है. साथ ही जिले की हर ग्राम पंचायत में प्राकृतिक संसाधनों का डेटाबेस तैयार किया जाए. यह बात एनजीटी की प्रिंसिपल बेंच के सदस्य डॉ. अफरोज अहमद ने पर्यावरण समिति की बैठक में कही.
कलेक्टर कार्यालय के सभागृह में पर्यावरण संरक्षण एवं जल संवर्धन और वायु गुणवत्ता सुधार को लेकर एनजीटी के सदस्य की उपस्थिति में समीक्षा बैठक हुई. बैठक में एनजीटी के डॉ. अफरोज अहमद ने कहा कि एनजीटी अपने आदेशों एवं निर्देशों में इंदौर मॉडल का उल्लेख भी कर रहा है. अधिकारियों ने बैठक में बताया गया कि चालू वर्ष 2025 के लिए जिला पर्यावरण प्लान बन गया है. इस प्लान में वेस्ट मैनेजमेंट, वायु गुणवत्ता, वेटलैंड मैनेजमेंट, वृक्षारोपण आदि पर विशेष ध्यान देने का प्रावधान रखा गया है. डॉ. अफरोज को जानकारी दी गई कि 432 जल संरचनाओं को परियोजना में वेटलैंड मैनेजमेंट प्लान के तहत शामिल किया गया है. अहमद ने कहा कि जिले की हर ग्राम पंचायत में प्राकृतिक संसाधनों की मैपिंग कर डेटाबेस बनाएं. डेटा में जल सरंचना, वृक्ष, पहाड़ आदि की जानकारी सम्मिलित हो. उन्होंने कहा कि सभी तालाबों का सीमांकन भी कराया जाए. वृक्षारोपण अभियान में पौधों की सुरक्षा, रखरखाव और संधारण के लिए भी पंचायत स्तर समिति बनाई जाएं.
