ईरान के परमाणु केंद्रों पर हमलों से परमाणु अप्रसार व्यवस्था के ध्वस्त होने का खतरा: ग्रॉसी

वियना, 23 जून (वार्ता) अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के महानिदेशक राफेल मारियानो ग्रॉसी ने सोमवार को कहा कि इजरायल-ईरान के बीच चल रहे संघर्ष से वैश्विक परमाणु अप्रसार व्यवस्था के ध्वस्त होने का खतरा उत्पन्न हो गया है। उन्होंने इस संकट को हल करने के लिए कूटनीति की आवश्यकता पर बल दिया।

श्री ग्रॉसी ने आईएईए के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स को दिए अपने बयान में कहा, ”इस संघर्ष के कारण वैश्विक परमाणु अप्रसार व्यवस्था के ध्वस्त होने का खतरा है। लेकिन कूटनीति के लिए अभी भी एक रास्ता है। हमें इसे अपनाना होगा। अन्यथा हिंसा और विनाश अकल्पनीय स्तर तक पहुंच सकता है और वैश्विक अप्रसार व्यवस्था जिसने आधी सदी से अधिक समय तक अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा को बरकरार रखा है वो चरमरा सकती है और धवस्त हो सकती है ।”

गौरतलब है कि आईएईए महानिदेशक ने रविवार को घोषणा की थी कि ईरान की तीन परमाणु केंद्रों पर अमेरिकी हमलों के मद्देनजर सोमवार को बोर्ड ऑफ गवर्नर्स की एक आपात बैठक आयोजित की जाएगी।

उन्होंने कहा कि ईरान, इजरायल और पश्चिम एशिया को शांति की जरूरत है और शांति के लिए कई कदम उठाए जाने हैं। सभी पक्षों को बातचीत की मेज पर वापस आना चाहिए और इसके लिए आईएईए के निरीक्षकों को ईरान के परमाणु स्थलों पर जाने और यूरेनियम के भंडार का हिसाब रखने की अनुमति दी जानी चाहिए, जिसमें सबसे महत्वपूर्ण रूप से 60 प्रतिशत तक संवर्धित 400 किलोग्राम यूरेनियम शामिल है।

उन्होंने कहा कि ईरान के विदेश मंत्री डॉ. अब्बास अराघची ने 13 जून को उन्हें पत्र लिखकर कहा था कि “ईरान हमारे परमाणु उपकरणों और सामग्रियों की सुरक्षा के लिए विशेष उपाय करेगा।” मीडिया में ऐसी खबरें थीं कि तीन परमाणु केंद्रों पर अमेरिकी हमलों से पहले ईरान ने लगभग 400 किलोग्राम यूरेनियम को किसी अज्ञात स्थान पर ले गया था। अमेरिकी मीडिया ने अपनी रिपोर्ट में दो अज्ञात इजरायली अधिकारियों के हवाले से कहा है कि यह दिखाने के लिए पर्याप्त सबूत हैं कि ईरान ने अमेरिकी हमलों से पहले 60 प्रतिशत शुद्धता तक संवर्धित 400 किलोग्राम यूरेनियम को किसी अज्ञात स्थान पर ले जाया था।

आईएईए महानिदेशक ने कहा कि ईरान में किसी सुरक्षित स्थल से किसी अन्य स्थान पर परमाणु सामग्री के किसी भी हस्तांतरण की घोषणा एजेंसी के ईरान के सुरक्षा समझौते के तहत की जानी चाहिए। किसी भी समझौते के लिए ज़मीन पर तथ्यों को स्थापित करना एक पूर्व-आवश्यकता है और यह केवल आईएईए निरीक्षणों के माध्यम से ही किया जा सकता है।

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