अटकलों पर विराम लगाते हुए सौरव गांगुली ने अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं पर पहली बार खुलकर बात की; कहा- मुख्यमंत्री पद का प्रस्ताव मिलेगा तभी लेंगे राजनीति में एंट्री का विचार।
कोलकाता, 23 जून (नवभारत): भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान और ‘प्रिंस ऑफ कोलकाता’ के नाम से मशहूर सौरव गांगुली की राजनीति में एंट्री को लेकर लंबे समय से चली आ रही अटकलों पर अब विराम लगता दिख रहा है। हाल ही में, गांगुली ने अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं पर पहली बार खुलकर बात की है, और उनके बयान ने एक बार फिर राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह तभी राजनीति में प्रवेश करने पर विचार करेंगे जब उन्हें मुख्यमंत्री पद का सीधा प्रस्ताव मिलेगा।
सौरव गांगुली का यह बयान ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। पिछले कई सालों से, विभिन्न राजनीतिक दलों, खासकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) द्वारा, गांगुली को अपने पाले में लाने की कोशिशें की जा रही थीं। हालांकि, गांगुली ने हमेशा खुद को क्रिकेट प्रशासन और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों तक ही सीमित रखा था। उनके इस नए बयान ने स्पष्ट कर दिया है कि वह किसी छोटे-मोटे पद के लिए राजनीति में नहीं आएंगे, बल्कि सीधे राज्य की कमान संभालने जैसे बड़े अवसर की तलाश में हैं। यह उनकी महत्वाकांक्षा और दूरदर्शिता को दर्शाता है कि वह राजनीति में प्रवेश तभी करेंगे जब उन्हें महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का मौका मिलेगा।
बंगाल की राजनीति में ‘दादा’ का प्रभाव, भविष्य की सियासी बिसात पर नजर
सौरव गांगुली का पश्चिम बंगाल में एक अजेय लोकप्रियता और सम्मान है। क्रिकेट के मैदान पर उनकी कप्तानी ने जिस तरह भारतीय टीम को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया, उसी तरह बंगाल की जनता उन्हें एक प्रेरणास्रोत के रूप में देखती है। यही कारण है कि राजनीतिक दल उन्हें अपने साथ जोड़ना चाहते हैं, क्योंकि उनकी उपस्थिति चुनावी समीकरणों को बदलने की क्षमता रखती है।
गांगुली के इस बयान के बाद, अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या पश्चिम बंगाल में कोई राजनीतिक दल उन्हें मुख्यमंत्री पद का प्रस्ताव देने के लिए आगे आएगा। यह देखना दिलचस्प होगा कि भविष्य की सियासी बिसात पर ‘दादा’ की भूमिका क्या होगी। फिलहाल, उन्होंने अपनी शर्तों को साफ कर दिया है, जिससे यह स्पष्ट है कि यदि वह राजनीति में आते हैं, तो यह एक बड़ा और निर्णायक कदम होगा, न कि सिर्फ एक सामान्य राजनीतिक एंट्री।

