
मंडला, आदिवासी बाहुल्य मंडला जिले के नैनपुर विकास खंड के शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार की परतें एक-एक कर खुल रही हैं। नैनपुर विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय में 33 लाख रुपये के घोटाले का बड़ा मामला सामने आया है। यह खुलासा जबलपुर से पहुंचे सहायक संचालक, वित्त शाखा द्वारा की गई प्रारंभिक जांच के दौरान हुआ, जिसे उन्होंने मीडिया से साझा किया।
जांच में सामने आया कि निवर्तमान लेखापाल सुरेश तिवारी ने सातवें वेतनमान के एरियर्स के नाम पर गंभीर वित्तीय गड़बड़ी की। आरोप है कि उन्होंने स्थानांतरित और मृत कर्मचारियों के नाम पर वेतन व एरियर्स की निकासी की और वह राशि अपने व परिजनों के निजी खातों में ट्रांसफर कर दी। यह सुनियोजित घोटाला वर्षों तक बारीकी से छिपाया गया, जिसकी परतें अब जाकर खुल रही हैं।
निवास के बाद नैनपुर में भी घोटाला
इससे पहले भी मंडला जिले के निवास BEO कार्यालय में इसी तरह का एक मामला सामने आया था, जहाँ लाखों रुपये के गबन की पुष्टि हुई थी। अब नैनपुर कार्यालय में हुए 33 लाख के गबन ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सहायक संचालक, वित्त शाखा जबलपुर द्वारा की गई जांच के प्रमुख बिंदु:
मृत और स्थानांतरित कर्मचारियों के नाम पर फर्जी भुगतान
परिवार के सदस्यों के खातों में सरकारी राशि ट्रांसफर
एरियर्स और वेतन मदों में गड़बड़ी कर निकासी
कोई वैध प्रलेख या स्वीकृति नहीं पाई गई
सहायक संचालक, वित्त शाखा के अनुसार मामले की रिपोर्ट जबलपुर व मंडला के उच्च अधिकारियों को भेज दी गई है। संभावना जताई जा रही है कि जल्द ही लेखापाल सुरेश तिवारी के विरुद्ध FIR दर्ज कर विभागीय और कानूनी कार्रवाई शुरू की जाएगी। साथ ही पूरे कार्यालय के लेखा अभिलेखों की विस्तृत ऑडिट कराए जाने की मांग उठ रही है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने इस घोटाले की सीबीआई या आर्थिक अपराध शाखा से जांच की मांग की है।
