जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट ने पूर्व आदेश का पालन न होने के मामले को काफी सख्ती से लिया। जस्टिस विशाल मिश्रा की एकलपीठ के समक्ष सरकार की ओर से अंडरटेकिंग दी गई कि वर्ष 1991 में याचिकाकर्ता से ली गई 6 हजार 7 सौ वर्गफुट जमीन उसे तीन दिन के भीतर वापस कर दी जाये। उक्त अंडरटेकिंग को मद्देनजर रखते हुए न्यायालय ने स्पष्ट किया कि यदि आदेश का पालन नहीं हुआ तो अगली सुनवाई के दौरान कलेक्टर पुन: हाजिर होकर स्पष्टीकरण देंगे। एकलपीठ ने मामले की अगली सुनवाई छह अक्टूबर को निर्धारित की है।
दरअसल यह मामला छिंदवाड़ा के यशवंत राव की ओर से वर्ष 2012 में दायर किया गया था। जिनकी ओर से अधिवक्ता मनीष तिवारी ने बताया कि सरकार ने 1991 में याचिकाकर्ता की जमीन अधिग्रहित की थी। वह कई सालों तक मुआवजे के लिए भटकता रहा। पूर्व में हाईकोर्ट ने जमीन वापस करने के आदेश दिए थे। स्पष्ट आदेश के बावजूद सरकार ने न ही याचिकाकर्ता को जमीन वापस की और न ही मुआवजा दिया। जिस पर पिछली सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सरकार को कड़ी फटकार लगाई थी और कलेक्टर छिंदवाड़ा को हाजिर होने कहा था। निर्देशानुसार कलेक्टर शीलेंद्र सिंह उपस्थित हुए। जिसके बाद न्यायालय ने उक्त निर्देश दिये।
