बिहार में ताड़ के पेड़ों की कटाई पर एनजीटी का नोटिस

नयी दिल्ली 19 जून (वार्ता) राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकारण (एनजीटी) ने बिहार में ताड़ के पेड़ोें की बड़े पैमाने पर कटाई और उससे बढ़ रही बिजली गिरने की घटनाओं से मौत के मामले को स्वत: संज्ञान लेते हुये बिहार प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के रांची स्थित क्षेत्रीय कार्यालय, बिहार आपदा प्रबंध विभाग और केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नोटिस जारी किया है।

एनजीटी की राजधानी स्थित मुख्य पीठ ने इसको लेकर मीडिया में आयी खबर को स्वत: संज्ञान लेते हुये कहा कि यह मामला पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 के तहत आता है। एनजीटी ने इस मामले काे कोलकाता स्थित पीठ को हस्तातंरित करते हुये सुनवाई की अगली तिथि सात अगस्त 2025 तय की है। एनजीटी ने सभी को नोटिस जारी करते हुये जबाव दाखिल करने के लिए कहा है।

बिहार में बिजली की घटनाओं में वर्ष 2016 से लेकर अप्रैल 2025 तक 2446 मौते हो चुकी हैं। मीडिया रिपोर्ट में कहा गया था कि ताड़ी पर पाबंदी लगाने के बाद ताड़ के पेड़ों का आर्थिक महत्व खत्म हो गया है और ग्रामीण क्षेत्रों में व्यापक पैमाने पर इसके पेड़ काटे गये हैं। लोगों ने अब इसके पेड़ लगाना लगभग छोड़ दिया है। पेड़ोें की कटाई होने से बिजली गिरने की घटनाओं में वृद्धि हुयी है जिससे इसकी वजह से होने वाली मौतें भी बढ़ी है।

इसमें कहा गया है कि बिजली गिरने की अधिकतर घटनायें दोपहर 12.30 बजे से लेकर शाम 4.30 बजे के बीच होती है जब अधिकांश लोग खेत में काम हर रहे होते हैं। इससे सबसे अधिक प्रभावित जिलों में गया, औरंगाबाद, रोहतास, पटना, नालंदा, कैमूर, भोजपुर और बक्सर है।

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