बड़वानी, 19 जून (वार्ता) मध्यप्रदेश के राज्यपाल मंगु भाई पटेल ने आज कहा कि शिक्षा और जागरूकता के साथ ऐसा प्रयास किया जाना चाहिए ताकि 2047 में एक भी बच्चा सिकल सेल से प्रभावित पैदा न हो।
राज्यपाल ने आज बड़वानी से 8 किलोमीटर दूर तलून में ‘विश्व सिकल सेल रोग जागरूकता दिवस’ के आयोजन के अवसर पर संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षा और जागरूकता के साथ ऐसा प्रयास किया जाना चाहिए, ताकि 2047 में एक भी बच्चा सिकल सेल से प्रभावित पैदा ना हो।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘ना भूतो ना भविष्यति’ निरूपित हुए करते हुए कहा कि उनके और राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू के नेतृत्व में यह आदिवासी युग का स्वर्ण काल चल रहा है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री आदिवासियों की विशेष चिंता करते हैं, इसलिए उन्होंने आदिवासी समाज में व्याप्त सिकल सेल रोग के उन्मूलन के लिए मिशन आरम्भ कर बजट में 15000 करोड़ का प्रावधान किया है।
उन्होंने सिकल सेल रोग और इसके उन्मूलन के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि प्रदेश के 89 आदिवासी विकास खंडों की पंचायत ने प्रस्ताव पारित किया है कि यदि होने वाले वर वधु को सिकल सेल रोग है तो वह उसकी शादी नहीं करेंगे। उन्होंने जेनेटिक कार्ड बनवाने ,गर्भधारण होने पर जांच और रोगी पाये जाने पर उपचार शुरू करने ,और बच्चा पैदा होने के बाद 72 घंटे में जांच कराए जाने पर जोर दिया।
उन्होंने आगामी एक जुलाई से 100 दिन के सिकल सेल स्क्रीनिंग अभियान में सभी की भागीदारी आवश्यक निरूपित करते हुए कहा कि इस हेतु जागरूकता फैलाने की अपील की।
उन्होंने आदिवासी अधिकारियों, नेताओं डॉक्टर प्रोफेसर से अपील की कि समय पर जांच और उपचार हेतु जागरूक करें। उन्होंने आदिवासी वर्ग के 10 प्रतिशत डॉक्टरों को सिकल सेल विशेषज्ञ बनने और इसे विभिन्न स्तर के पाठ्यक्रमों में शामिल करने की अपील भी की।
उन्होंने बताया कि प्रदेश में सिकल सेल की स्क्रीनिंग और उपचार संबंधी कार्यक्रम सक्रियता से चल रहे हैं। उन्होंने कहा कि सिकल सेल उन्मूलन में अंग्रेजी दवाइयों के प्रभावी होने के साथ साथ अलावा आयुर्वेदिक दवा की भी शुरुआत हुई है। उन्होंने अपील की कि जांच के अलावा समय पर दवाई लेने के लिए भी जागरूक किया जाये।
इस कार्यक्रम में राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मू मौसम की प्रतिकूलता के चलते शामिल नहीं हो सकीं। उनके संदेश का वाचन उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने किया।
मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव भी मौसम की प्रतिकूलता नहीं आ सके और उन्होंने इंदौर से ही जन सभा को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संबोधित किया।
मुख्यमंत्री डॉ यादव ने कहा कि चूंकि सिकल सेल आनुवंशिक बीमारी है इसलिये जिस तरह से कुंडली मिलाई जाती है उसी तरह से शादी के पूर्व व और वधू के जेनेटिक कार्ड मिलाया जाना चाहिए। इससे समय रहते पर रोग का पता चल जाता है और भावी पीढ़ियां सुरक्षित हो जाती है।
मुख्यमंत्री ने राज्यपाल मंगू भाई पटेल का सिकल सेल की जागरूकता में सबसे बड़ा योगदान निरूपित करते हुए कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री के माध्यम से इस बीमारी के खिलाफ व्यापक काम किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सिकल सेल केवल स्वास्थ्य का संकट नहीं है बल्कि परिवार के लिए सामाजिक और आर्थिक संकट भी पैदा करता है, इसलिए लगातार रोग प्रबंधन, परामर्श और जन जागरण के माध्यम से इस पर काबू पाने के प्रयास किये जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में राष्ट्रीय सिकल सेल उन्मूलन मिशन के अंतर्गत स्क्रीनिंग रिपोर्टिंग डेटाबेस ट्रैकिंग और सिकल सेल पोर्टल के माध्यम से एक करोड़ 6 लाख से अधिक नागरिकों की सिकल सेल स्क्रीनिंग की जा चुकी है। इसमें से 2 लाख से अधिक वाहक चिन्हित हुए हैं, और 29277 लोग रोग से ग्रसित पाए गए हैं। उन्होंने बताया कि अब तक 80 लाख 9 हजार से अधिक सिकल सेल कार्ड वितरित किये जा चुके हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि केन बेतवा परियोजना की तरह किसानों के कल्याण के लिए मध्यप्रदेश ने महाराष्ट्र के साथ नर्मदा ताप्ती नदी के सिंचाई का प्रकल्प तैयार करने की योजना बनाई है। मुख्यमंत्री ने प्रदेश में फूड प्रोसेसिंग इकाई , खेतों में सोलर पंप, रोजगार के लिए औद्योगिकरण व सरकारी नौकरियों, गरीबों के मकान के दोबारा सर्वे , 500 की आबादी में प्रधानमंत्री सड़क, सांदीपनी स्कूल, 19 शहरों में शराब बंदी ,दुग्ध उत्पादन, नर्मदा परिक्रमा वासियों के लिए सुविधा सम्बन्धी भी जानकारी दी।

