
नयी दिल्ली, 19 जून (वार्ता) उच्चतम न्यायालय ने अपहरण के एक मामले में तमिलनाडु के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक एच एम जयराम के संलिप्त होने के आरोप से संबंधित उच्च न्यायालय के आदेश को खारिज करते हुए गुरुवार को इससे किसी अन्य पीठ में स्थानांतरित करने का निर्देश दिया।
न्यायमूर्ति उज्जल भुयान और न्यायमूर्ति मनमोहन की अंशकालीन कार्य दिवस ने इसके अलावा तमिलनाडु सरकार से संबंधित मामले की जांच अपराध शाखा – आपराधिक जांच विभाग (सीबी-सीआईडी) को सौंपने का भी आदेश दिया।
पीठ ने आदेश पारित करते हुए कहा,“हम मुख्य न्यायाधीश (तमिलनाडु उच्च न्यायालय) से इसे (मामले को) किसी अन्य पीठ को सौंपने का अनुरोध करेंगे।”
वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने उच्च न्यायालय के सोमवार के उक्त आदेश को चुनौती देते हुए शीर्ष अदालत के समक्ष याचिका दायर की थी।
पीठ ने इस मामले में सुनवाई करते हुए कल तमिलनाडु सरकार को फटकार लगाते हुए सवाल किया था कि क्या जांच में पहले ही शामिल हो चुके वरिष्ठ अधिकारी को निलंबित करना जरूरी था?
यह मामला तिरुवल्लूर पुलिस द्वारा दर्ज अपहरण मामले में विधायक जगन मूर्ति द्वारा उच्च न्यायालय में दायर अग्रिम जमानत याचिका से जुड़ा है।
लक्ष्मी नाम के एक व्यक्ति द्वारा दायर शिकायत में आरोप लगाया गया कि उसके छोटे बेटे (18 वर्ष) का अपहरण कर लिया गया और बाद में उसे घायल अवस्था में पाया गया। आरोप लगाया गया कि लड़के को एडीजीपी के सरकारी वाहन में छोड़ा गया था और विधायक भी कथित रूप से साजिश का हिस्सा थे।
मद्रास उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति पी वेलमुरुगन ने जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए पुलिस को श्री जयराम के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई करने का निर्देश दिया था। न्यायमूर्ति वेलगुरुगन ने कहा था कि एक लोक सेवक होने के नाते वह लोगों के प्रति जवाबदेह हैं और यह कड़ा संदेश दिया जाना चाहिए कि कोई भी कानून से ऊपर नहीं है।
गौरतलब है कि उच्च न्यायालय ने पुलिस अधिकारी को गिरफ्तार करने का आदेश दिया था।
