मुंबई 22 नवंबर (वार्ता) एक दिल को छू लेने वाले आदेश में बॉम्बे उच्च न्यायालय ने कहा कि एक मृत किशोर के माता-पिता अपने बेटे की मौत का गलत फायदा नहीं उठा सकते और रेलवे अधिकारियों को माता-पिता को मुआवज़ा देने का निर्देश दिया।
गौरतलब है कि 2008 में 17 साल के जयदीप तांबे की ट्रेन से गिरने के बाद दुखद मौत हो गई थी। रेलवे दावा न्यायाधिकरण ने पहले परिवार के दावे को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि पीड़ित के पास वैध टिकट नहीं मिला था और दूसरे सहायक रिकॉर्ड गायब थे।
हालांकि, याचिकाकर्ता के वकील और रेलवे के प्रतिनिधियों की दलीलें सुनने के बाद, उच्च न्यायालय ने न्यायाधिकरण के फैसले को पलट दिया। न्यायालय ने रेलवे को परिवार को 6 प्रतिशत ब्याज के साथ 4 लाख रुपये मुआवज़े के तौर पर देने का आदेश दिया।
उच्च न्यायालय ने कहा कि रेलवे अधिनियम एक लाभ दिलाने वाला कानून है और ऐसे दावों का आकलन करते समय हालात के सबूतों पर विचार किया जाना चाहिए। कोर्ट ने हाल ही में उपलब्ध कराए गए अपने आदेश में यह भी साफ़ किया कि अगर कुल मुआवज़े की रकम 8 लाख रुपये से ज़्यादा है, तो माता-पिता ज़्यादा से ज़्यादा 8 लाख रुपये के हकदार होंगे।
