
रायसेन। जिले में कृषि विभाग इस वर्ष खरीफ फसल के लिए 8307 मीट्रिक टन रासायनिक खाद की व्यवस्था में जुटा है। पिछले वर्षों में खाद उपयोग में वृद्धि के कारण मिट्टी में नाइट्रोजन और जिंक जैसे पोषक तत्वों की कमी पाई गई है। इस बीच जैविक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए मप्र राज्य जैविक खेती प्रमाणीकरण संस्था के माध्यम से पंजीयन अनिवार्य किया गया है। जिले में अब तक एक हजार किसानों ने पंजीयन कराया है, जबकि वर्ष 2015-16 में डेढ़ हजार किसानों ने जैविक खेती के लिए पंजीयन कराया था।
कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार जैविक खेती न केवल स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है बल्कि किसानों के लिए कम लागत में अधिक आय का जरिया बन सकती है। प्राकृतिक खेती की ओर भी किसानों का रुझान बढ़ रहा है। राजेश चौधरी जैसे किसानों ने सहजन, पपीता और टमाटर जैसी फसलों से लाखों की कमाई की मिसाल पेश की है।
पंजीयन कराना अनिवार्य
किसानों को जैविक खेती करने से पूर्व संस्था का पंजीयन कराना अनिवार्य होता है। कृषि विज्ञान केंद्र नकतरा के वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ स्वप्निल दुबे ने बताया कि यदि कोई किसान जैविक खेती शुरू करता है तो उसके प्रमाणीकरण के लिए प्रमाणीकरण संस्था से पंजीयन कराना जरूरी होता है। इसके बाद लगातार 3 साल तक संसद द्वारा इस खेती पर निगरानी की जाती है।इसके बाद संस्था के निरीक्षक इस बात की पुष्टि करते हैं कि किसान द्वारा अपने खेत में फसल करने के जैविकखाद और जैविक दवाओं का पूरी तरह से उपयोग किया गया है। नियमानुसार तीन सालों तकआर्गेनिक खेती करने व नियमों का पालन करने के लिए संस्था द्वारा पूर्ण जैविक खेती का प्रमाण पत्र जारी किया जाता है।इसके बाद ही यह माना जाता है कि किसानों द्वारा जैविक खेती की जा रही है।
न पैसों का झंझट, न जमीन को नुकसान
तहसील रायसेन के परसौरा पैमत ब्यावरा किसान पारंपरिक खेती से प्राकृतिक खेती की ओर मुड़ गए हैं. प्राकृतिक खेती में रासायनिक खेती से कम खर्च आता है और बेहतर परिणाम मिलते हैं. किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए विभिन्न कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं. इ
इनका कहना है
एक हजार किसानों द्वारा प्रमाणीकरण पंजीयन कराया
इस बार रायसेन जिले में 2 हजार हैक्टेयर में जैविक खेती करने का लक्ष्य रखा है। इस प्रोजेक्टर को एक एनजीओ संस्था देख रही है। अभी जिले में एक हजार किसान का प्रमाणीकरण संस्था में पंजीयन कराया गया है। इस साल पंजीयन लगातार किया जा रहा है।
दुष्यंत पटेल उपसंचालक कृषि अधिकारी
