
सुसनेर। विगत 4 दिनों से सुसनेर विधानसभा क्षेत्र के ग्राम कंवराखेडी में 19 वर्षीय नवविवाहिता महिला मनीषा बाई का केस प्रशासन के लिए सिस दर्द बना हुआ था. सोमवार को महिला की मृत्यु हो गई. इधर महिला के इलाज के बाद से ही सोयतकलां का फर्जी चिकित्सक अपना क्लीनिक बंद करके फरार है तो वही फर्जी चिकित्सक की लापरवाही का शिकार हुई महिला ने सोमवार को इंदौर के एक निजी अस्पताल में दम तोड़ दिया. इसके बाद महिला के शव को पुराना बस स्टैंड स्थित शासकीय सिविल अस्पताल में लाया गया. यहां पर एसडीओपी देवनारायण यादव, सोयत टीआई यशवंतराव गायकवाड व पुलिस बल की मौजूदगी में अस्पताल के प्रभारी सीबीएमओ डॉक्टर ब्रजभूषण पाटीदार और डॉक्टर नीलम जैन के द्वारा मृतक महिला के शव का पोस्टमार्टम किया गया है.
गौरतलब है कि चार दिनों पूर्व सोयतकलां के समीपस्थ ग्राम कंवराखेड़ी की 19 वर्षीय नवविवाहिता मनीषा बाई पत्नी भेरूलाल मालवीय मामूली पेट दर्द के इलाज के लिए सदर बाजार स्थित ताज मेडिकल स्टोर पर गई थी. क्लीनिक अजीज खान नामक व्यक्ति संचालित करता है. यहीं पर उसने मनीषा को कुछ गोलियां दीं और एक इंजेक्शन लगाया. कुछ ही घंटों में मनीषा को इंजेक्शन वाली जगह पर जलन, सूजन और गठान होने लगी. इसके बाद दोनों पैरों में झटके आने शुरू हो गए. अप्रशिक्षित चिकित्सा संचालक द्वारा लगाए गए इंजेक्शन से ऐसा इंफेक्शन फैला कि आखिरकार उसकी सांसें इंदौर के एक अस्पताल में थम गई.
चार अस्पतालों की दौड़, अंत में टूटी सांसें
हालत खराब होने के बाद महिला फिर उक्त चिकित्सक के पास गई तो उसने इलाज करने से मना कर दिया. जब हालत ज्यादा खराब हुई तो परिजनों ने उसे झालावाड़ के शासकीय अस्पताल में भर्ती कराया. वहां से कोटा रैफर किया गया. कोटा के अस्पताल में भी जब कोई सुधार नहीं हुआ तो इंदौर के एक निजी अस्पताल में आईसीयू में भर्ती किया गया. जहां पर इलाज के दौरान महिला की मृत्यु हो गई. महिला का उपाचार चार अस्पतालों में हुआ लेकिन वह जिंदगी से जंग हार गई. कई दिनों तक मौत से संघर्ष करने के बाद आखिरकार मनीषा ने दम तोड़ दिया. परिजन अब गम और गुस्से में हैं . क्योंकि एक मामूली लापरवाही ने उनकी बहू और पूरे परिवार का भविष्य छीन लिया.
ताल मेडिकल पर ताला, स्वास्थ्य विभाग बेखबर
सूत्रों के अनुसार अजीज खान का मेडिकल शुक्रवार से ही बंद पड़ा है. परिजनों द्वारा थाने में लिखित शिकायत दी जा चुकी है, समाचार भी लगातार मीडिया में प्रकाशित हो रहे हैं, फिर भी स्वास्थ्य विभाग की ओर से अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है. आमजन में इस बात को लेकर भारी रोष है कि जब मौत हो चुकी है मेडिकल पर ताला लग चुका है तब भी न तो कोई एफआईआर ना ही स्वास्थ्य विभाग का निरीक्षण सामने आया है.
