नयी दिल्ली, 14 जून (वार्ता) भारत ने ईरान-इजरायल संघर्ष पर शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के बयान से शनिवार को खुद को अलग कर लिया और कहा कि वह अपना दृष्टिकोण पहले ही स्पष्ट कर चुका है और एससीओ में इस बयान की चर्चा में भाग नहीं लिया है।
इससे पहले एससीओ की ओर से आज ही जारी एक बयान में “पश्चिम एशिया में में बढ़ते तनाव पर गंभीर चिंता व्यक्त की गयी और 13 जून, 2025 को ईरान के क्षेत्र पर इजरायल द्वारा किये गये सैन्य हमलों की कड़ी निंदा की गयी है। ”
भारतीय विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि इस मामले पर भारत की स्थिति 13 जून को स्पष्ट कर दी गयी थी और वही स्थिति बरकार है। विदेश मंत्रालय ने कहा है, “ हमारा आग्रह है कि तनाव कम करने के लिए बातचीत और कूटनीति के माध्यमों का उपयोग किया जाना चाहिए और यह आवश्यक है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस दिशा में प्रयास करे। ”
उल्लेखनीय है कि इजरायल- ईरान के बीच नये सैन्य टकराव के बीच विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शुक्रवार को ईरान के विदेश मंत्री से फोन पर स्थिति के बारे में बात की थी। कल ही इजरायल के विदेश मंत्री ने भी श्री जयशंकर को फोन कर स्थित से अवगत कराया था।
मंत्रालय का कहना है कि श्री जयशंयर ने शुक्रवार को ईरान के विदेश मंत्री से चर्चा में ताजा घटनाक्रम पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की गहरी चिंता से उनको अवगत कराया था। उन्होंने उनसे किसी भी तरह के आक्रामक कदम से बचने और कूटनीति की ओर जल्द लौटने का भी आग्रह किया था।
विदेश मंत्रालय ने कहा गया है, “ जैसा कि ऊपर बताया गया है, भारत के समग्र दृष्टिकोण को एससीओ के सदस्यों को बता दिया गया था, इसे ध्यान में रखते हुए, भारत ने उपर्युक्त एससीओ बयान पर चर्चा में भाग नहीं लिया।” भारत ने कल ईरान और इज़राइल के बीच घटनाक्रम पर गहरी चिंता व्यक्त की थी और कहा था कि वह परमाणु स्थलों पर हमलों से संबंधित रिपोर्टों सहित उभरती स्थिति पर बारीकी से नज़र रख रहा है।
भारत ने दोनों पक्षों से किसी भी तरह के आक्रामक कदम से बचने का आग्रह किया और कहा था कि वह दोनों देशों के साथ घनिष्ठ और मैत्रीपूर्ण संबंध हैं और वह हर संभव सहायता देने के लिए तैयार है।
सीसीओ के बयान में इजरायल की आलोचना में कहा गया है, “ ऊर्जा और परिवहन बुनियादी ढांचे सहित नागरिक लक्ष्यों के खिलाफ इस तरह की आक्रामक कार्रवाई, जिसके परिणामस्वरूप नागरिक हताहत हुये हैं, अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर का घोर उल्लंघन है। ये हमले ईरान की संप्रभुता का उल्लंघन करने वाले, क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा को नुकसान पहुंचाने वाले और वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए गंभीर जोखिम पैदा करने वाले हैं। ”
बयान में कहा गया है कि एससीओ के सदस्य देश ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी स्थिति के समाधान के लिए विशेष रूप से शांतिपूर्ण, राजनीतिक और कूटनीतिक तरीकों से दृढ़ता से वकालत करते हैं।
एससीओ एक अंतर-सरकारी संगठन है, जिसकी स्थापना 2001 में चीन, रूस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान द्वारा की गयी थी। 2017 में, इसमें भारत और पाकिस्तान को शामिल किया गया और 2023 में ईरान पूर्ण सदस्य बन गया। एससीओ में – मंगोलिया, बेलारूस और अफगानिस्तान पर्यवेक्षक देश हैं तथा श्रीलंका, तुर्की, कंबोडिया, अजरबैजान, नेपाल, आर्मेनिया, मिस्र, कतर, सऊदी अरब, बहरीन, कुवैत, म्यांमार, मालदीव और संयुक्त अरब अमीरात को संवाद में साझेदार देश का दर्जा प्राप्त है।
