
जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट ने करोड़ों रुपए के साइबर फ्रॉड के आरोपी को जमानत देने से इंकार कर दिया है। आरोपी अपने साथियों के साथ मिलकर फर्जी बैंक खातों से राशि को निकालकर दूसरे खातों में ट्रांसफर करता था। जस्टिस एमएस भट्टी की एकलपीठ ने कहा है कि मामले में आरोपी की भूमिका होने से इंकार नहीं किया जा सकता, इसलिए उसे जमानत का लाभ देना अनुचित है।
भोपाल के बागसेवनिया क्षेत्र में रहने वाले रहने वाले नितिश शुक्ला की तरफ से जमानत याचिका प्रस्तुत की गयी। जिसमें कहा गया था कि कोलार रोड थाना पुलिस ने उसे 21 दिसंबर 2024 को हिरासत में लिया था। प्रकरण के अनुसार बैंक ऑफ महाराष्ट्र की ओर से कोलार थाना पुलिस को बैंक खाते से हो रहे ट्रांजेक्शनों की शिकायत की गई थी। सरकार की तरफ से जमानत आवेदन का विरोध करते हुए एकलपीठ को बताया गया कि जांच के दौरान पाया गया कि फर्जी बैंक अकाउण्ट खोलकर उसमें करोड़ों रुपए का लेनदेन किया गया है। साइबर फ्रॉड जैसे संगठित अपराध के लिए बैंक में लोगों के नाम से फर्जी खाते खोलकर उसका उपयोग राशि निकालने व स्थनांतरण करने में किया जाता है। फर्जी बैंक खाते से आरोपी नितिश शुक्ला के खाते से भी बडी संख्या में ट्रांजेक्शन हुआ है। फर्जी लोगों के नाम से खोले गए खातों के एटीएम कार्ड, पासबुक, चेक बुक, एटीएम पिन, सिम कार्ड, कार्ड स्वाइप मशीन और मोबाइल जब्त किए गए। जमानत का लाभ मिलने पर आरोपी साक्ष्यों व गवाहों के साथ खिलवाड़ कर सकता है। एकलपीठ ने सुनवाई के बाद याचिका का निरस्त करते हुए जमानत देने से इंकार कर दिया।
