1857 के हुतात्मा संतों की स्मृति में स्वरांजली, पावगी व गोरे सम्मानित

ग्वालियर: ग्वालियर घराने के मूर्धन्य गायनाचार्य पंडित सीताराम शरण उन संगीतज्ञों में शुमार थे जिन्होंने अपनी स्वर साधना से आध्यात्मिक चमक ही पैदा नहीं की बल्कि जीवन पर्यंत सुरों को जिया। आज उनके शिष्य ग्वालियर में संगीत की अलख जगाए हुए हैं। यह उदगार सिद्धपीठ श्री गंगादास की बड़ी शाला में पंडित सीताराम शरण की पुण्यतिथि एवं 1857 के स्वतंत्रता समर के हुतात्मा संतों की स्मृति में आयोजित स्वरांजली समारोह में अतिथियों ने व्यक्त किए। रागायन की ओर से आयोजित इस समारोह में देश, प्रदेश और शहर के कलाकारों ने अपनी सांगीतिक प्रस्तुतियों से रसिकों को मुग्ध कर दिया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि संत कृपाल सिंह, विशिष्ट अतिथि अतुल अधौलिया एवं कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे रागायन के अध्यक्ष व सिद्धपीठ श्री गंगादास की बड़ी शाला के पीठाधीश्वर महंत रामसेवकदास ने मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलित कर एवं गुरु पूजन कर कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया।कार्यक्रम में रागायन परिवार की और से वर्ष 2024 के लिए प्रख्यात हवाईन गिटार वादक पंडित सुनील पावगी एवं 2025 के लिए विदुषी श्रीमती साधना गोरे को पंडित सीताराम शरण सम्मान से विभूषित किया गया। अतिथियों ने दोनों विभूतियों को शॉल श्रीफल एवं सम्मान पट्टिका प्रदान कर उनका अभिवादन किया।

स्वरांजली कार्यक्रम की शुरुआत प्रशस्ति गान से हुई। पंडित सीतारामशरण जी की शिष्या विदुषी डॉ वीणा जोशी और साधना संगीत कला केंद्र की छात्राओं ने पंडित महेशदत्त पांडे द्वारा रचित प्रशस्ति की शानदार प्रस्तुति दी। जय गुरुदेव नमन पंडित सीताराम शरण ..। इस प्रस्तुति में तबले पर अविनाश महाजनी और हारमोनियम पर नवनीत कौशल ने साथ दिया। इसके बाद सम्मानित कलाकार श्रीमती साधना गोरे ने अपनी प्रस्तुति में राग पुरिया कल्याण प्रस्तुत किया। आपके साथ तबले पर संगति डॉ. विनय बिंदे और हारमोनियम पर संगति संजय देवले ने की।

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