जबलपुर:मप्र हाईकोर्ट से याचिकाकर्ता वेटनरी डॉक्टर को राहत मिली है। जस्टिस विशाल मिश्रा की एकलपीठ ने याचिकाकर्ता डॉक्टर के खिलाफ दोबारा जांच करने के निर्णय को अनुचित मानते हुए उसे निरस्त कर दिया है।यह मामला उमरिया निवासी डॉ. एचएमएस बघेल की ओर से दायर किया गया था। जिसमें कहा गया था कि वे 1979 में वेटरनरी अस्सिटेंट सर्जन के पद पर नियुक्त हुए।
वर्ष 1985 में उन्हें प्रति नियुक्ति पर मध्य प्रदेश लाइव स्टॉक एंड पोल्ट्री डेवलपमेंट कॉरपोरेशन भोपाल की ब्रांच शहडोल में पदस्थ किया गया, जहां वह 1996 तक पदस्थ रहे। वर्ष 2003 में याचिकाकर्ता को एक आरोप पत्र देकर कहा गया कि शहडोल में पदस्थी के दौरान तीन लाख 35 हजार रुपए की विभाग को हानि हुई। दूसरा आरोप पांच लाख और तीसरा आरोप 57 लाख रुपए की गड़बड़ी का लगाया गया।
आवेदक की ओर से कहा गया कि शासन द्वारा बार-बार जांचकर्ता अधिकारी बदला गया। नियमानुसार एक वर्ष के भीतर जांच पूरी करनी थी। वर्ष 2009 में संचालक पशु चिकित्सा सेवा ने नए सिरे से पुराने जांचकर्ता अधिकारी से जांच कराने का निर्णय लिया। इसी को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। आरटीआई से प्राप्त दस्तावेजों से भी यह स्पष्ट था कि उनके खिलाफ कोई आरोप सिद्ध नहीं पाए गये। न्यायालय को बताया गया कि 20 मार्च 2009 को विभागीय जांच की फाइनल रिपोर्ट में याचिकाकर्ता को दोषी नहीं पाया गया, इसलिए दोबारा जांच का आदेश अवैधानिक है। जिसके बाद न्यायालय ने उक्त राहतकारी आदेश दिया।
