भोपाल:डॉ.अवधेश प्रताप सिंह, प्रमुख सचिव मप्र विधान सभा ने वृंदावन धाम में आयोजित श्रीकृष्ण योगपीठ की राष्ट्रीय परिषद सम्मेलन में भाग लेकर श्रीकृष्ण के जीवन से सीख एवं वर्तमान में गीता ज्ञान के महत्व पर विचार व्यक्त करते हुए कहा कि गीता वर्तमान युग और जीवन प्रबंधन का शास्त्र है। हमें गीता का पाठ करना पर्याप्त नहीं है बल्कि इसे जीवन में उतारने की आवश्यकता है। तभी समाज में आध्यात्मिक चेतना जागृत होगी इसमें योगपीठ की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।
डॉ.अवधेश प्रताप सिंह यादव ने कहा कि ऐसे आध्यात्मिक आयोजन सामयिक है तथा जीवन मूल्यों से परिचित कराने हेतु जहां बहुत उपयोगी होते हैं वहीं वर्तमान तनाव और डिप्रेशन के माहौल से बचाने के लिये गीता का कर्मयोग, अध्यात्म चिंतन या ध्यान ज़रूरी है आज यह समय की माँग है। उन्होंने आगे कहा कि मनुष्य भौतिक शरीर अर्थात् जीव और आत्मा का संयुक्त स्वरूप है परंतु मानव भौतिक संसाधन व शरीर को महत्व देकर शरीर को चालने वाली चैतन्य शक्ति की उपेक्षा करता है परिणाम स्वरूप तनाव डिप्रेशन की स्थिति निर्मित है।इसी स्थिति से उवारने के लिये श्रीकृष्ण ने गीता द्वारा अर्जुन को अध्यात्म चेतना, निमित्त भाव से कार्य का ज्ञान देकर नष्टो मोहा स्मृति लब्धा और निज स्वरूप में स्थित कर दिया।
आज जीवन समर में हम सब अर्जुन हैं, मन के द्वन्दों,अच्छी व आसुरी प्रवृत्तियों से ग्रस्त हैं यही असली आंतरिक महाभारत है इसमें विजय हेतु हमें अपने जीवन रथ का सारथी श्रीकृष्ण अथवा तपस्या मूरत से श्रीकृष्ण योग पीठाधीश्वर आचार्य प्रवर को बनाना चाहिए।इस अवसर पर विज्ञानाचार्य के साथ श्रीमती ललिता यादव,पूर्व मंत्री, जगदीश यादव,राष्ट्रीय संयोजक श्रीकृष्ण योगपीठ,देश के बिभिन्न प्रांतों से आये संयोजक, इंजी पुष्पेंद्र यादव सहित बड़ी संख्या में महिला पुरुष साधक उपस्थित थे।
