
सिंगरौली। गुरुवार को एनसीएल की विस्थापन नीति के विरोध में सिंगरौली विस्थापन संघर्ष समिति ने जयंत खदान के पास धरना-प्रदर्शन किया। सुबह 10 बजे से शुरू हुए इस आंदोलन में हजारों लोग शामिल हुए, जिसमें महिलाओं की भागीदारी प्रमुख रही। दोपहर 1 से 1:30 बजे के बीच चार बार हुई ब्लास्टिंग से प्रदर्शनकारियों का आक्रोश फूट पड़ा। महिलाओं ने पुलिस सुरक्षा घेरा तोड़ते हुए बच्चों और पुरुषों के साथ खदान में प्रवेश किया। कुछ महिलाएं मशीनों पर चढ़ने जा रही थीं, जिन्हें मोरवा एसडीओपी केके पांडेय व पुलिस बल ने रोका।
प्रदर्शन के दौरान एनसीएल के अधिकारी मौके पर पहुंचे और 12 जून को मुख्यालय में 10 सूत्रीय मांगों पर बैठक का आश्वासन दिया। इन मांगों में हर प्रकार की भूमि पर बसे परिवारों को 15 लाख की मुआवजा राशि, विस्थापन भत्ता बढ़ाकर 10 लाख करने, मेडिकल कार्ड, शिक्षा सुविधा जैसे मुद्दे शामिल हैं। पूर्व विधायक रामलल्लू बैस, राष्ट्रीय महासचिव अमित तिवारी व राजेश गुप्ता ने एनसीएल पर दोहरी नीति का आरोप लगाया। महिलाओं ने चेतावनी दी कि अगर हक नहीं मिला तो वे आमरण अनशन करेंगी। एनसीएल की ब्लास्टिंग को प्रदर्शनकारियों ने असंवेदनशील कदम बताया। पुलिस ने हालात को नियंत्रण में रखा।
इनका कहना
गैर पट्टेदरों एवं अन्य ने खदान के नजदीक धरना प्रदर्शन किया था। एनसीएल ने आज उनकी बात सुनी, आगे 12 जून को वार्ता के लिए आमंत्रित किया गया है। इस प्रदर्शन द्वारा उत्पन्न अवरोध से किसी भी तरह की उत्पादन क्षति की सूचना नहीं है ।
रामविजय
एनसीएल पीआरओ, सिंगरौली
