मरीजों की आपबीती : ड्यूटी रोस्टर बना फिर भी इमरजेंसी में नहीं हो रही मरीजों की जांच

रायसेन:जिला अस्पताल की लैब में जांच कराने के लिए दोपहर एक बजे लगी मरीजों की कतार। लेकिन मरीजों को जांच रिपोर्ट समय पर नहीं मिलती। जिससे मरीजों के इलाज में देरी हो जाती है। पैथोलॉजी विभाग की सुस्त कार्यप्रणाली का खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है।बेहतर उपचार के लिए एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड, रक्त परीक्षण, मूत्र परीक्षण सुविधाएं नहीं मिल पा रहीं।जिला अस्पताल की इमरजेंसी में गंभीर मामले आते हैं।

ट्रामा सेंटर संचालित न हो तो इमरजेंसी पर दबाव अधिक रहता है। घायलों के बेहतर उपचार की सुविधा के लिए एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड, रक्त परीक्षण, मूत्र परीक्षण आदि जैसी आवश्यक जांच प्रयोगशाला परीक्षण सुविधाओं की जरूरत होती है, जो नहीं मिल पाती है। इनके अलावा सोनोग्राफी एक्स-रे आदि की सुविधा भी नहीं मिल पाती है। ओपीडी के खुलने तक इंतजार करना पड़ता है।

दरअसल जिला अस्पताल की लैब में लैब टेक्नीशियन कमी होने के बाद भी इमरजेंसी में आने वाले मरीजों को दोपहर बाद जांच की सुविधा नहीं मिल पा रही है। अस्पताल प्रबंधन का दावा है कि जहां पर 24 घंटे इलाज और जांच की सुविधा उपलब्ध है। परन्तु जिला अस्पताल का यह दावा खोखला साबित हो रहा है। मरीजों उनके अटेंडरों का कहना है कि दोपहर दो बजे के बाद आने वाले मरीजों को जांच की सुविधा नहीं मिल पाती है।

जांच के लिए अगले दिन का इंतजार करना पड़ता है। जरूरत पड़ने पर लोग बाहर से जांच कराते हैं। जिला अस्पताल की ओपीडी सुबह 9 बजे से शुरू होती है, ओपीडी के साथ ही पैथॉलाजी जांच भी शुरू हो जाती है। ओपीडी दोपहर दो बजे तक चलती है। पैथालॉजी में डेढ़ बजे के बाद सेंपल नहीं लिया जाता है। पीड़ित को सैंपल देने के लिए दूसरे दिन बुलाया जाता है।
अस्पताल में रोज 600 की ओपीडी
जिला अस्पताल में रोजाना 600 से 680 मरीजों की ओपीडी होती है। इनमें करीब 150 से 160 मरीजों की लैब में विभिन्न जांच डॉक्टरों द्वारा लिखी जाती है। इसके साथ ही मरीजों के लिए इमरजेंसी सेवा 24 घंटे होना चाहिए। लेकिन मरीजों को बमुश्किल 8 घंटे जांच सेवाएं मिल रही है। इमरजेंसी में जांच सुविधा नहीं मिलने से प्रायवेट लैब पर जांच के लिए भटकना पड़ता है। बताया जाता है कि इमरजेंसी में करीब 20 से 22 मरीज ऐसे होते हैं जो गंभीर होते हैं । उनकी जांच होना जरूरी होता है। लेकिन जिला अस्पताल में यह व्यवस्था ठीक नहीं होने की वजह से उन्हें अपनी जेब से प्रायवेट लैब पर महंगी जांच कराना पड़ती है।
हेल्प डेस्क पर कोई नहीं होता
जिला अस्पताल में पूछताछ के लिए बनाए गए हेल्प डेस्क सिर्फ दिखावा साबित हो रहे हैं। इमरजेंसी में मरीजों की मदद के लिए अस्पताल में हेल्प डेस्क बनाए गए, वहां पूछताछ के लिए बाकायदा कर्मचारियों को भी तैनात किया गया है।जिला अस्पताल में हेल्प डेस्क सुविधा भी लोगों के लिए दूर की कौड़ी साबित हो गई है।
लैब में कोई नहीं था
मुझे डिलेवरी होना थी।परिजन मुझे लेकर जिला अस्पताल के लैब में कोई नहीं था।मेरी यूरिन ब्लड की जांच होना थी।लेकिन परेशान होते रहे।
कविता वर्मा महिला
24 घण्टे जांच सुविधा… दिखावा
जिला अस्पताल की लैब में 24 घण्टे जांच सुविधा का अस्पताल प्रबंधन दावा करता है।लेकिन धरातल पर सिर्फ दिखावा साबित हो रहा है।आलम यह है कि दोपहर 2 बजे के बाद किसी तरह की जांच नहीं होती मजबूरी में बाहर के प्राइवेट जांचें कराना पड़ती हैं।
दिनेश कुमार सिंह

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