इंदौर मेट्रो: तांगे से मेट्रो तक सफर का नया अध्याय, ताई को नजरअंदाज करने पर सवाल

इंदौर: स्वतंत्रता के बाद इंदौर में तांगे जनता का मुख्य परिवहन साधन थे। राजबाड़ा से चलने वाले तांगों से न पर्यावरण को नुकसान होता था, न व्यवस्था बिगड़ती थी। 1980 के दशक में राज्य परिवहन निगम की सिटी बसें, टेंपो, फिर रिक्शा और बाद में सिटी वेन ने जगह ली। 1995 के बाद सिटी बसें धीरे-धीरे बंद हो गईं और दिग्विजय सिंह सरकार के दौरान परिवहन निगम भी खत्म कर दिया गया। इसके बाद जेएनयूआरएम योजना के तहत 2010-11 में फिर से सिटी बसें शुरू हुईं।

समय के साथ डीजल से सीएनजी और फिर इलेक्ट्रिक बसों, ई-रिक्शा और बैटरी वाहन तक शहर ने हर बदलाव को अपनाया। अब पर्यावरण और यातायात को सुगम बनाने के लिए मेट्रो रेल सेवा शुरू हुई है। इंदौर देश का 16वां मेट्रो शहर बन गया है, जो तकनीक, विकास और जनहित में बड़ी उपलब्धि है।हालांकि देवी अहिल्या बाई होलकर की जयंती पर मेट्रो शुभारंभ को महिला सशक्तिकरण से जोड़ा गया, लेकिन शहर की आठ बार सांसद रहीं सुमित्रा महाजन (ताई) को इस कार्यक्रम में न बुलाना भाजपा नेतृत्व के फैसलों पर सवाल खड़ा करता है। ताई की उपेक्षा से कई लोगों में असंतोष देखा गया।

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