
भोपाल। मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा है कि विदिशा जिले से सामने आई एक दर्दनाक तस्वीर, जिसमें एक मासूम बच्ची सड़कों पर लगे कचरे के ढेर में खाने के लिए कुछ तलाशती दिखाई दे रही है, ने पूरे देश में शासन और सामाजिक कल्याण की स्थिति को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी है। उन्होंने कहा कि यह तस्वीर सिर्फ एक बच्ची की मजबूरी नहीं, बल्कि प्रशासनिक संवेदनहीनता और व्यवस्था की गहरी विफलता का प्रतीक बन चुकी है।
यह मुद्दा तब और गंभीर हो गया जब लोकसभा में प्रतिपक्ष के नेता राहुल गांधी ने हाल ही में उस घटना का उल्लेख किया, जिसमें स्कूल के बच्चों को दोपहर के भोजन के दौरान अखबार पर खाना परोसा गया। इसने सरकार की बच्चों के पोषण और कल्याणकारी योजनाओं के प्रति प्राथमिकताओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पटवारी ने कहा कि मध्यप्रदेश कुपोषण, मातृ मृत्यु दर, शिशु मृत्यु दर, महिलाओं पर अपराध और महिलाओं के लापता होने जैसे कई सामाजिक मानकों पर देश के सबसे कमजोर राज्यों में बना हुआ है। उनके अनुसार, ये आंकड़े सिर्फ सरकारी रिकॉर्ड नहीं, बल्कि लाखों परिवारों के दैनिक संघर्ष की सच्चाई को दर्शाते हैं।
उन्होंने आगे कहा कि इन गंभीर चुनौतियों के बावजूद मुख्यमंत्री राज्य से बाहर राजनीतिक मंचों पर भाषण देने में अधिक व्यस्त दिखाई देते हैं, जबकि राज्य के बुनियादी विकास संबंधी मुद्दे उपेक्षित बने हुए हैं। उन्होंने बताया कि “लाड़ली बहना” जैसी योजनाओं की घोषणाएँ तो जोर-शोर से की गईं, लेकिन वादा किए गए ₹3000 प्रतिमाह की सहायता अभी तक पूरी तरह लागू नहीं हो पाई है।
इस बीच राज्य का बढ़ता राजकोषीय घाटा भी आवश्यक सामाजिक योजनाओं के क्रियान्वयन पर असर डाल रहा है। विपक्ष का आरोप है कि कई योजनाएँ ज़मीन पर कम और विज्ञापनों में ज्यादा दिखाई देती हैं।
कांग्रेस ने सरकार से भूख, महिला सुरक्षा, युवाओं की बेरोज़गारी और सामाजिक सुरक्षा के मुद्दों पर गंभीरता से ठोस कदम उठाने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि अब जनता को केवल आश्वासनों की नहीं, बल्कि संवेदनशील और जवाबदेह शासन की आवश्यकता है।
