ग्वालियर: फर्स्ट नेशनल मूट कोर्ट प्रतियोगिता में महिलाओं के हित में पारित 33% आरक्षण बिल को लेकर बहस हुई। याचिकाकर्ता पक्ष ने इसे संविधान के अनुच्छेद 14, 19, और 21 का उल्लंघन बताते हुए असंवैधानिक ठहराया, जबकि विरोधी पक्ष ने संसद द्वारा विधिक प्रक्रिया के अनुसार पारित इस कानून को उचित बताया। सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने याचिकाएं खारिज कर आरक्षण को सही ठहराया।
इस प्रतियोगिता में सरसुना लॉ कॉलेज, कोलकाता विजेता रहा और 21,000 रुपये नकद, ट्रॉफी व प्रमाण पत्र प्राप्त किए। क्राइस्ट यूनिवर्सिटी, बैंगलोर को उपविजेता घोषित किया गया, जिन्हें 11,000 रुपये, ट्रॉफी व मेडल दिए गए। अरुक्षिता देशवाल को बेस्ट रिसर्चर, अमिटी यूनिवर्सिटी लखनऊ को बेस्ट मेमोरियल और सोबिक भट्टाचार्य को बेस्ट मूटर का पुरस्कार मिला, सभी को 7000 रुपये, ट्रॉफी व प्रमाण पत्र मिले। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. राजेन्द्र प्रसाद बांदिल ने की तथा आभार प्राचार्य डॉ. नीति पांडे ने व्यक्त किया।
संयोजन डॉ. राजेन्द्र सिंह धाकड़ व छात्र संयोजक अहद खान ने किया। माधव विधि महाविद्यालय में हुए आयोजन में संपूर्ण भारत से 24 टीमों ने भाग लिया जिसका प्रारंभिक राउंड ऑनलाइन के माध्यम से किया गया उसमें से आठ टीम का चयन क्वार्टर फाइनल के लिए किया गया एवं सेमी फाइनल और फाइनल फिजीकल मोड़ से आज महाविद्यालय कैंपस में आयोजन हुआ जिसमें प्रथम राउंड में सेमीफ़ाइनल का आयोजन किया गया।
इस अवसर पर न्यायाधीश की भूमिका में अनमोल खेडकर अधिवक्ता उच्च न्यायालय, तेज माणिक, अखंड प्रताप सिंह एवं अक्षत जैन अधिवक्ता उच्च न्यायालय ग्वालियर रहे । इस मूट कोर्ट के फ़ाइनल में न्यायाधीश की भूमिका हेतु के.एन गुप्ता सीनियर एडवोकेट मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ग्वालियर खंडपीठ एवं राजेश शुक्ला पूर्व अतिरिक्त महाधिवक्ता मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय खंडपीठ ग्वालियर जज के रूप में उपस्थित थे।
