कर्नाटक भाजपा ने डीजल के दाम बढ़ने को लेकर आंदोलन किया तेज, वापसी की मांग की

बेंगलुरु, 02 अप्रैल (वार्ता) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की कर्नाटक इकाई के अध्यक्ष विजयेंद्र येदियुरप्पा ने बुधवार को कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला किया, जिसमें उन्होंने डीजल की कीमतों में दो रुपये की बढ़ोतरी के राज्य सरकार के फैसले को लेकर मुख्यमंत्री सिद्दारमैया पर अहंकारी होने का आरोप लगाया।

श्री येदियुरप्पा ने फ्रीडम पार्क में मीडिया को संबोधित करते हुए राज्य सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि वह आम लोगों की आर्थिक कठिनाइयों से अनभिज्ञ है। यहां भाजपा विधायकों, विधान परिषद सदस्यों और पूर्व विधायकों ने विरोध प्रदर्शन किया।

उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री का अहंकार स्पष्ट है। कांग्रेस सरकार ने जमीनी हकीकत को समझे बिना यह लापरवाही भरा फैसला लिया है। बेंगलुरु में वातानुकूलित कमरों में आराम से बैठे हुए मुख्यमंत्री और उनका मंत्रिमंडल आम नागरिकों के संघर्षों को समझने में विफल रहा है।” भाजपा नेता ने मांग की कि श्री सिद्दारमैया और उनके मंत्री अपनी नीतियों के प्रभाव को प्रत्यक्ष रूप से देखने के लिए राज्य का दौरा करें, तभी वे अपने कार्यों के परिणामों को समझ पाएंगे।

श्री येदियुरप्पा ने यह भी घोषणा की कि भाजपा मूल्य वृद्धि के खिलाफ विरोध प्रदर्शन तेज करेगी और सरकार से जनता के हित में निर्णय वापस लेने का आग्रह करेगी। हाल ही में 18 भाजपा विधायकों के निलंबन पर चिंता जताते हुए उन्होंने इस कदम को ‘अभूतपूर्व और असंवैधानिक’ करार दिया। उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष पर ‘कांग्रेस सरकार के एजेंट’ के रूप में काम करने का आरोप लगाया और निलंबन को तत्काल रद्द करने की मांग की। उन्होंने कहा, “निर्वाचित प्रतिनिधियों को छह महीने के लिए निलंबित करना और उनकी विधायी शक्तियों को सीमित करना बेतुका है। हम विधानसभा अध्यक्ष की कुर्सी का सम्मान करते हैं, लेकिन इस फैसले को बिना शर्त वापस लिया जाना चाहिए।”

उन्होंने कहा कि जब तक निलंबन वापस नहीं लिया जाता, तब तक भाजपा विधायक और विधान परिषद सदस्य विरोध के तौर पर सभी समिति बैठकों का बहिष्कार करेंगे। अध्यक्ष यूटी खादर ने 18 भाजपा विधायकों को छह महीने के लिए निलंबित कर दिया, जिसमें ‘आसन के प्रति अनादर’ और संसदीय परंपराओं को कमजोर करने वाले आचरण का हवाला दिया गया। विधायकों ने अध्यक्ष के आसन पर धावा बोला, उन पर कागज फेंके और सरकारी निविदाओं में मुसलमानों को दिए गए चार फीसदी आरक्षण का विरोध करते हुए कार्यवाही को बाधित किया। उन्होंने सहकारिता मंत्री केएन राजन्ना के उन आरोपों की न्यायिक जांच की भी मांग की, जिसमें उन्होंने कहा था कि उनके समेत 48 राजनेताओं को हनी-ट्रैप का निशाना बनाने का प्रयास किया गया था।

 

 

 

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