इस्लामाबाद, 26 मई (वार्ता) पाकिस्तान अपने आगामी संघीय बजट को प्रस्तुत करने के लिए तैयार है और उसने परंपरा से हटकर अपने आर्थिक दृष्टिकोण को बदलने का निर्णय लिया है और इसमें केवल राजकोषीय संतुलन के बजाय दीर्घकालिक आर्थिक सुधारों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
पाकिस्तानी समाचारपत्र डॉन ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि 10 जून को पेश होने वाली इस योजना के बारे में वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगजेब ने कहा कि यह नयी योजना अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के साथ चल रही बातचीत एवं बढ़ते आर्थिक दबावों के बीच सुधार के लिए एक स्पष्ट मार्ग तैयार करेगी।
श्री औरंगजेब ने इस्लामाबाद में एक कार्यक्रम में कहा, “इस बार हम बजट में कुछ साहसिक कदम उठाने जा रहे हैं, क्योंकि बजट सिर्फ राजस्व एवं व्यय के बारे में नहीं है, बल्कि यह अर्थव्यवस्था की स्थिति एवं उसकी दिशा के बारे में रणनीतिक दिशा प्रदान करने का माध्यम है। इसलिए हमारी पूरी कोशिश है कि इस दस्तावेज़ को अधिक रणनीतिक बनाया जाए, न कि केवल गणित को सही किया जाए। निश्चित रूप से, हमें गणित को सही करना है।”
वित्त मंत्री ने कहा कि ऋण सेवा लागत में एक ट्रिलियन पाकिस्तानी रुपये (3.6 अरब अमेरिकी डॉलर) की कमी आई है और अगले वित्तीय वर्ष के लिए ऋण प्रबंधन कार्यालय के आधुनिक सुधार की योजना बनाई गई है। उन्होंने आयात निर्भरता को कम करने और विदेशी उधार के बार-बार होने वाले चक्र से मुक्त होने की आवश्यकता पर भी जोर दिया, जो आईएमएफ के साथ पाकिस्तान के 24 कार्यक्रमों का एक प्रमुख कारण है।
कर आधार को व्यापक बनाने, वेतनभोगियों के लिए कर प्रणाली को सुविधाजनक बनाने एवं संघीय राजस्व बोर्ड (एफबीआर) को डिजिटल बनाने के लिए सुधार किए जा रहे हैं। औरंगजेब ने पुष्टि किया कि 24 सरकारी स्वामित्व वाले उद्यमों को निजीकरण आयोग को सौंप दिया गया है।
आईएमएफ के बारे में उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने अपने एजेंडे को दरकिनार करने के प्रयासों के बावजूद सभी कार्यक्रम लक्ष्यों को पूरा कर लिया है तथा वर्चुअल रूप से बातचीत जारी है।
यह बजट ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान लगातार आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहा है, जिसमें मुद्रास्फीति, विदेशी मुद्रा की कमी और बढ़ता राजकोषीय घाटा शामिल है। हालांकि हाल के संकेत स्थिरता की ओर इशारा करते हैं, लेकिन निरंतर सुधारों के अभाव में देश की अर्थव्यवस्था कमज़ोर बनी हुई है।
