रेसीडेंसी क्षेत्र की जमीन; खसरे नंबर डालने में डिजिटल बंदोबस्त और कानूनी पेंच बने बाधा

इंदौर: रेसीडेंसी क्षेत्र की 732 एकड़ जमीन पर खसरे का नंबर दर्ज करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंचने के बावजूद पिछले छह महीनों से ठप है। डिजिटल बंदोबस्त पायलट प्रोजेक्ट में क्षेत्र को शामिल किए जाने और जमीन के कुछ हिस्सों पर कोर्ट में प्रकरण लंबित होने के कारण यह कार्य अधर में लटक गया है। जिसके बाद शासन से मार्गदर्शन मांगा गया है, जबकि दोबारा सेटेलाइट सर्वे समेत अन्य प्रक्रियाएं शुरू होने की संभावना जताई जा रही है।

कलेक्टर राजस्व विभाग ने एक एक व्यक्ति और काबिज लोगों की सूची बनाई थी. सूची के आधार और लीज के साथ कुछ कॉलोनियों की जमीन भी रेसीडेंसी क्षेत्र की जमीन में शामिल हैं, जिसमें धार कोठी और आजाद नगर जैसी अवैध बस्ती भी शामिल है. कलेक्टर राजस्व विभाग ने उक्त कार्य पूरा कर 732 एकड़ जमीन का नक्शा  भी बना लिया और वह ऑनलाइन कंप्यूटर पर अपलोड भी कर दिया गया था। रेसीडेंसी क्षेत्र में करीब 2232 खसरे नंबर डालने की तैयारी भी हो गई थी और जमीन पर कब्जे के हिसाब से बाटांकन भी हो चुका था। सिर्फ खसरे नंबर डालकर कंप्यूटर पर अपलोड करने का काम शेष था.
फिर से होगी अन्य कार्रवाई
राज्य सरकार प्रदेश में 50 गांवों में पायलेट प्रोजेक्ट के तहत डिजिटल बदोबस्त की कार्ययोजना ले आई. उसमें इंदौर का रेसीडेंसी क्षेत्र भी शामिल कर लिया. उक्त प्रोजेक्ट के तहत अब सेटेलाइट से फोटो लेकर फिर से सर्वे और अन्य कारवाई की जाएगी. इससे जमीन पर खसरे नंबर डालने का कार्य छह महीने से अधर में लटका हुआ है.
शासन से मार्गदर्शन मांगा
तहसीलदार प्रीति भिसे ने बताया कि पायलेट प्रोजेक्ट में डिजिटल बंदोबस्त करने के लिए सरकार ने रेसीडेंसी की जमीन भी शामिल की है. साथ में उक्त जमीन नजूल की भी है, जिसमें शासन से मार्गदर्शन भी मांगा है, क्योंकि जमीन के कुछ हिस्सों पर सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट में प्रकरण विचाराधीन है.

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