श्रीनगर (वार्ता) जम्मू-कश्मीर पुलिस ने श्रीनगर में कथित तौर पर प्रतिबंधित संगठन की विचाराधारा को बढ़ावा देने वाली 668 पुस्तकें जब्त की हैं।
पुलिस ने हालांकि प्रतिबंधित संगठन का नाम नहीं बताया।
पुलिस ने एक बयान में कहा कि प्रतिबंधित संगठन की विचारधारा को बढ़ावा देने वाले साहित्य की गुप्त बिक्री और वितरण के बारे में विश्वसनीय खुफिया जानकारी के आधार पर उन्होंने श्रीनगर में तलाशी ली। तलाशी में 668 पुस्तकें जब्त की गईं।
पुलिस ने कहा कि उन्होंने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएसएस) की धारा 126 के तहत कानूनी कार्रवाई शुरू की है। आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि श्रीनगर में एक प्रकाशन गृह और पुस्तक भंडार पर छापेमारी की गई और किताबें जब्त की गईं। इनमें जमात-ए-इस्लामी के संस्थापक मौलाना मौदूदी द्वारा लिखी गई किताबें भी शामिल हैं। 28 फरवरी 2019 को केंद्र सरकार ने जमात पर प्रतिबंध लगा दिया था। जमात के कई नेताओं ने पिछले साल विधानसभा चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा था।
इस बीच पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) नेता और महबूबा मुफ़्ती की बेटी इल्तिजा मुफ़्ती ने छापेमारी की निंदा की। उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा ‘दिल्ली में सुरक्षा समीक्षा बैठक के कुछ दिनों बाद श्रीनगर में किताबों की दुकानों पर क्रूर छापे मारे गए।
उन्होंने पोस्ट में कहा ‘सुरक्षा’ की आड़ में कश्मीरियों पर हर तरह के काफ़्काई दमनकारी उपाय किए जा रहे हैं। अब तो पढ़ने और जानकारी प्राप्त करने की आज़ादी का भी हनन किया जा रहा है। क्या हम सिर्फ़ भेड़ या मवेशी हैं जिन्हें चराने की ज़रूरत है।’
उन्होंने कहा ‘इन किताबों की छापेमारी में सबसे बड़ी समस्या यह है कि ज़ब्त की गई सभी 600 किताबें अबुल आला मौदूदी द्वारा लिखी गई हैं जो एक प्रसिद्ध इस्लामी विद्वान और सबसे महत्वपूर्ण बात जमात-ए-इस्लामी के संस्थापक हैं।
उन्होंने कहा, ‘यह एक धार्मिक संगठन है जिसने कश्मीर में सराहनीय सामाजिक कार्य किया है और हाल ही में हुए राज्य चुनावों में भी भाग लिया है।’
