अंकारा में नाटो शिखर सम्मेलन : रक्षा खर्च पर तेज होती बहस के बीच जेलेंस्की और एर्दोगान से मिलेंगे ट्रंप

वॉशिंगटन, 06 जुलाई (वार्ता) अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप नाटो शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए इस सप्ताह तुर्की का दौरा करेंगे।

उनका यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है, जब अमेरिका और ईरान के बीच अस्थिर युद्धविराम को लेकर तनाव बना हुआ है। इसके अलावा, रक्षा खर्च, सैन्य खर्च की हिस्सेदारी और यूरोपीय सुरक्षा में अमेरिका की भूमिका को लेकर कई नाटो सहयोगियों के साथ उनके रिश्तों में तल्खी जारी है।

बेश्तेपे राष्ट्रपति परिसर में मंगलवार और बुधवार को होने वाले इस दो दिवसीय शिखर सम्मेलन की अध्यक्षता नाटो के महासचिव मार्क रुटे करेंगे। सम्मेलन की औपचारिक शुरुआत मंगलवार को होगी और अगले दिन इसके समापन की उम्मीद है, जिसके बाद श्री ट्रंप संवाददाता सम्मेलन करेंगे। इस नाटो शिखर सम्मेलन का मुख्य ध्यान रक्षा निवेश, औद्योगिक उत्पादन, यूक्रेन को समर्थन और व्यापक क्षेत्रीय मुद्दों पर रहेगा।

यूरोपीय संघ और उसके सदस्य देश अपनी सुरक्षा के लिए बड़ी जिम्मेदारी उठा रहे हैं। इसके तहत वे रक्षा खर्च बढ़ाने, क्षमता से जुड़ी पहलों को लागू करने, औद्योगिक सुदृढ़ीकरण, यूक्रेन को मजबूत एवं निरंतर सैन्य सहायता देने और साझेदारियों को मजबूत करने पर काम कर रहे हैं। अंकारा में अपने प्रवास के दौरान वे तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगान और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की के साथ द्विपक्षीय बातचीत कर सकते हैं। इसके साथ ही वे गठबंधन के अन्य नेताओं के साथ कई उच्च स्तरीय कार्य सत्रों में भी हिस्सा लेंगे।

बयान में कहा गया है कि श्री ट्रंप बुधवार को कई उच्च स्तरीय कार्यक्रमों का हिस्सा बनेंगे, जिनमें शिखर सम्मेलन का आधिकारिक स्वागत, पारंपरिक ग्रुप फोटो और गठबंधन के नेताओं के साथ कार्य सत्र शामिल है। इसके अलावा यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की और सीरिया के राष्ट्रपति अहमद अल-शरा के साथ भी उनकी द्विपक्षीय बैठकें प्रस्तावित हैं।

नाटो के महासचिव मार्क रुटे की इस चर्चा में मुख्य रूप से गठबंधन की एकजुटता बनाये रखने और रक्षा उत्पादन को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित करने की उम्मीद है। इसके साथ ही वे सदस्य देशों को इस बात के लिए भी प्रोत्साहित करेंगे कि वे बढ़े हुए रक्षा खर्च को वास्तविक सैन्य क्षमता में बदलें। अंकारा शिखर सम्मेलन नाटो नेताओं की आधिकारिक तौर पर 36वीं बैठक है। यह आयोजन अत्यधिक भू-राजनीतिक तनाव के बीच गठबंधन के सभी 32 सदस्य देशों को एक साथ लाता है। यह तनाव मुख्य रूप से यूक्रेन में जारी युद्ध और रूस के दीर्घकालिक रणनीतिक इरादों को लेकर बनी व्यापक चिंताओं की वजह से है।

नाटो सदस्यों के अलावा, ऑस्ट्रेलिया, जापान, न्यूजीलैंड और दक्षिण कोरिया सहित कई हिंद-प्रशांत साझेदारों के भी इसमें भाग लेने की उम्मीद है, जो इस गठबंधन के बढ़ते वैश्विक जुड़ाव को दर्शाता है। शिखर सम्मेलन के साथ-साथ ‘नाटो रक्षा उद्योग मंच’ का भी आयोजन किया जायेगा, जिसका मुख्य ध्यान सदस्य देशों में हथियारों के उत्पादन, खरीद और सैन्य तैयारियों पर होगा। अंकारा में होने वाले इस शिखर सम्मेलन की तुलना वर्ष 2004 के इस्तांबुल शिखर सम्मेलन से की जायेगी, जो शीत युद्ध के बाद नाटो के विस्तार और बदलाव का एक अहम पड़ाव था।

 

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