सागर, 20 मई (वार्ता) मध्यप्रदेश के सागर की आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) ने किसान क्रेडिड कार्ड (केसीसी) लोन के तहत 82 लाख रुपए से अधिक की धोखाधड़ी के मामले में तत्कालीन बैंक मैनेजर सहित पंद्रह लोगों पर आपराधिक मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
ईओडब्ल्यू के सूत्रों के अनुसार ईओडब्ल्यू सागर को शिकायत प्राप्त हुई थी कि बैंक ऑफ बड़ौदा शाखा सिरोजा जिला सागर के बैंक अधिकारी द्वारा निजी व्यक्तियों के साथ मिलकर केसीसी लोन स्वीकृति में नियमों का पालन न कर बैंक से साथ धोखाधड़ी की है। इस शिकायत की जांच ईओडब्ल्यू सागर के द्वारा की गयी। जांच उपरांत ईओडब्ल्यू में आपराधिक प्रकरण दर्ज कर विवेचना में लिया गया है।
ईओडब्ल्यू द्वारा की गई जांच में पाया गया कि बैंक ऑफ बड़ौदा शाखा सिरोंजा की तत्कालीन शाखा प्रबंधक अर्चना बाघमारे द्वारा अपने साथी गजेन्द्र सिंह, कमलेश अहिरवार के साथ मिलकर केसीसी ऋण स्वीकृति में कृषि भूमि रकबा, उपजाई जाने वाली फसलों, पूर्व से बंधक भूमि इत्यादि तथ्यों को निजी व्यक्तियों की सहभागिता से छिपाकर दस्तावेजों में कूटरचना कर ऋण स्वीकृत किया गया। ऋण जारी करने के पूर्व निरीक्षण कार्य में भी बैंक मैनेजर द्वारा सही सत्यापन नहीं किया गया। बैंक मैनेजर द्वारा पैनल अधिवक्ता (बैंक से अधिकृत अधिवक्ता) से सत्यापन रिपोर्ट प्राप्त न करते हुए अन्य अधिवक्ता व्हीएसजेबी राणा से सत्यापन रिपोर्ट प्राप्त की गई। कूटरचित दस्तावेजों को अधिवक्ता व्ही एस जे बी राणा के द्वारा प्रमाणित किया गया। इस प्रकार जांच में बैंक मैनेजर द्वारा निजी व्यक्तियों के साथ मिलकर भ्रष्टाचार कर, कूटरचित दस्तावेजों के माध्यम से बैंक को 82.44 लाख रूपये की आर्थिक क्षति पहुंचाकर अवैध लाभ प्राप्त किया जाना पाया गया।
इसके बाद बैंक मैनेजर अर्चना बाघमारे उसके साथी गजेन्द्र सिंह, कमलेश अहिरवार, अधिवक्ता व्ही एस जे बी राणा एवं अपात्र व्यक्ति दौलत सिंह, प्रेमलाल कुर्मी, बल्वेद सिंह, कामता सिंह, राघवेन्द्र सिंह, विजय सिंह, लीलाधर सिंह, पंचम सिंह, रामप्रसाद साहू, हरिबाई और रघुराज घोषी के विरुद्ध विभिन्न धाराओं में प्रकरण पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया है। विवेचना के दौरान अन्य व्यक्तियों की भूमिका सामने आने पर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

