दिल्ली | मणिपुर में पिछले करीब एक साल से लागू राष्ट्रपति शासन आगामी 12 फरवरी को समाप्त होने जा रहा है। इसी के साथ राज्य में लोकतांत्रिक सरकार की बहाली के लिए राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने मुख्यमंत्री के चयन और सरकार गठन की रणनीति पर चर्चा करने के लिए मणिपुर के सभी एनडीए विधायकों को दिल्ली तलब किया है। भाजपा की प्रदेश अध्यक्ष शारदा देवी और 20 से अधिक विधायक पहले ही राजधानी पहुँच चुके हैं। इस बैठक में सहयोगी दल नेशनल पीपुल्स पार्टी (NPP) और नागा पीपुल्स फ्रंट (NPF) के नेताओं को भी शामिल किया गया है।
राज्य की कमान किसके हाथ में होगी, इसे लेकर फिलहाल सस्पेंस बना हुआ है। पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने बैठक को लेकर सकारात्मक रुख अपनाया है और उम्मीद जताई है कि सभी सहयोगियों के साथ मिलकर एक स्थिर सरकार बनाई जाएगी। हालांकि, केंद्रीय नेतृत्व राज्य की वर्तमान परिस्थितियों और जातीय समीकरणों का गहन विश्लेषण करने के बाद ही नेता का चयन करेगा। 60 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा के पास 37 विधायक हैं, जबकि एनपीपी के 6 और एनपीएफ के 5 विधायकों के साथ एनडीए का पलड़ा भारी नजर आ रहा है।
मणिपुर में सरकार गठन की यह प्रक्रिया मई 2023 से जारी जातीय हिंसा की पृष्ठभूमि में हो रही है, जिसमें अब तक 260 से अधिक लोग जान गंवा चुके हैं। पिछले साल 13 फरवरी को एन. बीरेन सिंह के इस्तीफे के बाद राष्ट्रपति शासन लागू कर विधानसभा को निलंबित रखा गया था। अब जबकि विधानसभा का कार्यकाल 2027 तक शेष है, केंद्र सरकार की प्राथमिकता एक ऐसी सरकार गठित करने की है जो मैतेई और कुकी समुदायों के बीच विश्वास बहाली कर सके। 12 फरवरी से पहले होने वाली यह बैठक मणिपुर के राजनीतिक भविष्य के लिए निर्णायक साबित होगी।

