भिंड: राष्ट्रीय लुप्तप्राय प्रजाति दिवस पर सामान्य वन मंडल, भिण्ड तथा सामाजिक संस्था सुप्रयास द्वारा जिला वन मंडल अधिकारी कार्यालय में “चंबल संभाग में लुप्तप्राय प्रजातियों की स्थिति” विषय पर कार्यशाला का आयोजन किया गया।कार्यशाला को संबोधित करते हुए रेंज ऑफिसर वसंत शर्मा ने कहा कि यह दिन लुप्तप्राय प्रजातियों की स्थिति के बारे में जागरूकता बढ़ाने और संरक्षण प्रयासों को बढ़ावा देने के लिए समर्पित है।
इस कार्यशाला के माध्यम से वन्यजीवों और उनके आवासों की रक्षा के महत्व को समझने में मदद मिलती है। प्रोफेसर इकबाल अली ने कहा कि आईयूसीएन रेड लिस्ट लिस्ट 2021 के अनुसार, भारत में कुल 199 प्रजातियाँ गंभीर रूप से संकटग्रस्त श्रेणी में मानी गई हैं। लुप्तप्राय प्रजातियाँ ऐसी प्रजातियाँ हैं जिनके निकट भविष्य में विलुप्त होने की बहुत संभावना है।
लुप्तप्राय प्रजातियाँ निवास स्थान के नुकसान, अवैध शिकार, आक्रामक प्रजातियों और जलवायु परिवर्तन जैसे कारकों के कारण खतरे में पड़ सकती हैं। पर इससे भी बड़ा कारण मनुष्यों के कारण है। लोग जंगलों को काटकर, हवा या पानी को प्रदूषित करके या शहरों और सड़कों का निर्माण करके जानवरों के प्राकृतिक आवासों को नष्ट कर देते हैं। गंभीर रूप से लुप्तप्राय ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (अर्डियोटिस नाइग्रिसेप्स) जिसे सोन चिरैया भी कहा जाता है। कभी अपने ग्वालियर चंबल संभाग में पाई जाती थी अब बिल्कुल दिखाई नहीं देती है।
कार्यशाला को संबोधित करते हुए प्रोफेसर हरेंद्र देव शर्मा ने कहा कि भारत में 10 जैव भौगोलिक क्षेत्र हैं और यहां अब तक दर्ज स्तनधारी प्रजातियों में से 8.58 फीसदी का घर है, जबकि पक्षी प्रजातियों के लिए यह आंकड़ा 13.66 फीसदी है। इस कार्यशाला का उद्देश्य पृथ्वी के लुप्तप्राय वनस्पतियों और जीवों के संरक्षण के बारे में जागरूकता फैलाना है। प्रकृति के सबसे शानदार जीव लुप्तप्राय हो रहे हैं।
