
नीमच। जिले में चंबल नदी के डूब क्षेत्र की जमीन में इन दिनों खरबूजे की खेती की जा रही है। खास बात है कि गांधी सागर डैम के बैक वाटर में सालभर में पांच महीने पानी भरा रहता है। किसान इस जमीन से दोहरा लाभ कमा रहे हैं। एक तरफ सरकार से जमीन का मुआवजा लिया है। वहीं, गर्मियों में खरबूजे के बीज बेच रहे हैं।
जिला मुख्यालय से 70 किलोमीटर दूर मनासा तहसील के पांच गांवों की बात करते हैं। ये गांव हैं रामपुरा, चचौर, कुंडवासा, कुंडला और खानखेड़ी। बारिश के दिनों में रामपुरा और कुकडेश्वर नगर से लगे अधिकांश गांवों में चंबल नदी का पानी पहुंचता है। करीब दो हजार से ज्यादा किसान खरबूजे की खेती कर बीज बेच रहे हैं।
गांधी सागर के बैक वाटर में खरबूजे की खेती की जा रही है।
फुर्सत को अवसर में बदलने से आया आइडिया कुंडला गांव के रहने वाले ओमप्रकाश गोस्वामी पेशे से शिक्षक हैं। ओमप्रकाश बताते हैं कि गर्मियों में स्कूल भी बंद रहते हैं। लोगों के पास भी ज्यादा काम नहीं रहता। करीब 25 साल पहले किसानों ने इसी फुर्सत के समय को अवसर में बदलने के लिए खरबूजे उगाने का एक्सपेरिमेंट किया था। शुरुआत में खरबूजा सिर्फ खाने के लिए उगाया जाता था, लेकिन इनके बीजों की अहमियत और मुनाफे का अंदाजा हुआ, तो अब इस फसल को सिर्फ बीज निकालने के लिए ही उगाया जाता है। खरबूजे को खाने में कम ही इस्तेमाल करते हैं।
शुरुआत में खरबूजे की खेती में अच्छा मुनाफा हुआ था। समय बीतने के साथ मुनाफा भी कम होता गया, क्योंकि जिस जमीन पर खरबूजे उगाते हैं, उस पर सालभर में 5 महीने पानी भरा रहता है। ऐसे में फसल चक्र नहीं हो पाता, इसलिए फसल प्रभावित होती है।
