जबलपुर: जिला प्रशासन द्वारा तुअर की फसल बेचने के लिए अंतिम तिथि 15 मई रखी गई थी, लेकिन आख़री दिन तक भी एक भी किसानों ने तुअर बेचने के लिए पंजीयन नहीं कराया है। जिससे यह साबित होता है कि जिले के किसान समर्थन मूल्य पर तुअर बेचने के लिए कोई दिलचस्पी नहीं रखते हैं। इसके अलावा जिला प्रशासन लगातार किसानों से तुअर के पंजीयन के लिए अपील भी कर रहा था, परंतु उसके बावजूद भी जिले के किसान तुअर बचने के लिए उत्साहित नजर नहीं आए।
जिसका परिणाम यह है कि जिले के किसानों ने एक भी पंजीयन नहीं कराया है। उल्लेखनीय है कि इस बार राज्य शासन के निर्देश पर तुअर बेचने किसानों को पंजीयन कराने के लिए तिथि को दो बार बढ़ाया है। जिसमें पहले इसकी तारीख 20 अप्रैल थी, जिसको बढ़ाकर 30 अप्रैल किया, अब इसकी तिथि को बढ़ा कर 15 मई कर दिया गया है।
10 हजार हैक्टेयर से अधिक रकबा
गौरतलब है कि जिले में तुअर का रकबा भी 10 हजार हैक्टेयर से अधिक बताया गया है। जिसमें शहपुरा-पाटन इसका प्रमुख उत्पादन क्षेत्र माना जाता है। इसके अलावा अन्य ग्रामीण अंचल में भी तुअर होती है। जिसके लिए शासन ने समर्थन मूल्य इसका भाव 7 हजार 550 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित कर रखा है।
पांच केंद्र हैं स्थापित किए थे
जानकारी के अनुसार समर्थन मूल्य पर तुअर बेचने किसानों का पंजीयन करने जिले में पांच केंद्र स्थापित किए गए थे। जिसमें इन पंजीयन केंद्रों में सहकारी विपणन संस्था जबलपुर, सहकारी विपणन संस्था मझौली, सहकारी विपणन संस्था शहपुरा, सहकारी विपणन संस्था सिहोरा एवं वृहताकार सहकारी संस्था बघराजी शामिल है। लेकिन गुरुवार 15 मई को अंतिम दिन तक भी किसानों ने पंजीयन नहीं कराया।
इनका कहना है
जिले में गुरुवार तक कोई भी पंजीयन नहीं हुआ है, पंजीयन की तिथि को भी दोबारा बढ़ाने के भी कोई आदेश नहीं आए हैं।
डॉ एस के निगम, कृषि उपसंचालक
