
खंडवा। मंत्री विजय शाह की मुश्किलें कम नहीं हो रही हैं। खंडवा समेत देश भर में उनके खिलाफ आक्रोश है।
हाईकोर्ट के निर्देश पर एफआईआर के बाद बुधवार की रात वे अपने विधानसभा क्षेत्र हरसूद के पास चारखेड़ा गांव पहुंचे। वहां उन्होंने रात समर्थकों से चर्चा कर गुजारी। अधिकृत तौर पर किसी भी तरह का ऐसा बयान नहीं दिया है, जिससे पार्टी लाइन प्रभावित हो।
मीडिया से लगातार दूरी
उन्होंने 2 मिनट का एक वीडियो अवश्य जारी किया है, जिसमें लेफ्टिनेंट कर्नल सोफिया कुरैशी के बारे में दिए गए वक्तव्य पर माफी मांगी है। उन्होंने कहा है कि किसी भी तरह से उनकी मंशा ऐसी नहीं थी। लोग अपने हिसाब से बयान को प्रसारित और प्रकाशित कर रहे हैं।विजय शाह अधिकृत तौर पर किसी भी मीडियाकर्मी से बयान देने के लिए नहीं मिले।
24 घंटे से मंत्री की लोकेशन नहीं!
गुरुवार को सुबह के बाद से ही वह अज्ञात स्थान पर निकल गए। हालांकि चर्चाएं कई तरह की रहीं कि यदि भाजपा उनके खिलाफ कार्रवाई करती है,तो वे नई पार्टी बना सकते हैं, या फिर इस्तीफा तभी देंगे जब नरेंद्र मोदी और अमित शाह से मुलाकात कर अपनी स्थिति स्पष्ट कर देंगे। हालांकि ये बाते उनकी ओर से नहीं की गई है। इन्हें अटकलें ही कहा जा रहा है।
सत्ता और संगठन में बोलबाला
मंत्री विजय शाह खंडवा जिले के लिए हरसूद से विधायक हैं। आदिवासियों में अच्छी पकड़ रखते हैं। इसकी वजह से सरकार और संगठन में उनका बोलबाला रहा है।
हरसूद विधानसभा सीट पर कुंवर विजय शाह का कब्जा है।
33 साल से विजय शाह हैं विधायक
आजादी के बाद 1957 में यह सीट वजूद में आई थी। पिछले 33 सालों से बीजेपी का इस सीट पर कब्जा है। 1990 के बाद से लगातार विजय शाह यहां से चुनाव जीत रहे हैं। उनके अजेय किले को कांग्रेस आज तक भेद नहीं पाई है। कांग्रेस की सारी रणनीति विजय शाह के आगे ढेर हो जाती है।
40 साल से आदिवासियों के लिए रिजर्व है हरसूर-खालवा सीट
यह सीट 1977 से अनुसूचित जनजाति के उम्मीदवारों के लिए रिजर्व है। विजय शाह आदिवासी समाज से आते हैं। बीजेपी की हर सरकार में विजय शाह मंत्री रहे हैं। अभी वह प्रदेश के आदिम जाति कल्याण एवं गैस राहत मंत्री हैं। मध्य प्रदेश में बड़े आदिवासी चेहरे के रूप में उनकी गिनती होती है। फिलहाल उनके बयान बाजी से वह आफत में हैं।
