सतना :जल गंगा संवर्धन अभियान सतना के अंतर्गत मां मंदाकिनी नदी पुनर्जीवन जागरूकता अभियान का शुभारंभ एक दिवसीय कार्यशाला के माध्यम से किया गया। इस अभियान का प्रथम चरण 11 मई से 18 मई तक आयोजित होगा। इसी क्रम में नदी पुनर्जीवन पर एक दिवसीय कार्यशाला कृषि विज्ञान केन्द्र मझगवां में आयोजित की गई। इस मौके पर कुलगुरु महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय भरत मिश्रा, सीईओ जिला पंचायत संजना जैन, डीआरआई के संगठन सचिव अभय महाजन, तकनीकी विशेषज्ञ प्रवीण पाठक, संभाग समन्वयक, जन अभियान परिषद, रीवा संभाग, डॉ. नवीन शर्मा, डॉ. अखिलेश जांगड़े, वरिष्ठ वैज्ञानिक, कृषि वैज्ञानिक केंद्र, मझगवां तथा जिला समन्वयक डॉ. राजेश तिवारी उपस्थित रहे। कार्यशाला का शुभारंभ मां भारती और भारतरत्न नानाजी देशमुख के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलन के साथ किया गया।
एक दिवसीय कार्यशाला में वर्षा जल संचयन से मंदाकिनी नदी पुनर्जीवन विषय पर संबोधन करते हुए अभय महाजन द्वारा वैश्विक जल चुनौती और नदियों में उत्पन्न हो रहे जल संकट के प्रति चिंता जाहिर करते हुए कहा कि मंदाकिनी नदी जो अत्यंत प्राचीन और पौराणिक है। जिसकी महिमा चित्रकूट के कण- कण में व्याप्त है, इसलिए नदी पुनर्जीवन विषय समय की आवश्यकता है। आज की यह कार्यशाला आगामी समय में मंदाकिनी पुनर्जीवन हेतु सामाजिक भागीदारी के साथ-साथ तकनीकी विषय की समझ बढ़ाने में सहयोगी होगी।
कार्यक्रम में कुलगुरु भरत मिश्रा ने कहा कि नदियां जीवन दायिनी है और इनके सदानीरा रहने से आस-पास के क्षेत्रों में मानव जीवन के साथ-साथ वनस्पति और जीव जगत फलते-फूलते है। आज की यह कार्यशाला हमें नदियों के साथ क्या व्यवहार होना चाहिए उसकी शिक्षा देती है। वर्तमान समय में सबसे बड़ी चुनौती प्लास्टिक प्रदूषण है। जिसके कारण हमारी नदियां प्रदूषित हो रही है। इसलिए हम सभी का यह प्रयास होना चाहिए कि अपनी आस्था को प्लास्टिक मुक्त रखकर हम नदियों के आस-पास के परिवेश को प्लास्टिक मुक्त रख कर अपना योगदान कर सकते है।
सीईओ जिला पंचायत सीईओ संजना जैन ने कहा कि जिला प्रशासन द्वारा मां मंदाकिनी के पुनर्जीवन के लिए विस्तृत कार्ययोजना बनाकर कार्य प्रारंभ किया जा रहा है। जिसमें आस-पास के क्षेत्रों में विभिन्न जल संरचनाएं निर्मित करते हुए सघन पौधारोपण के माध्यम से जल संचयन के प्रयास प्रारंभ होंगे। खेत तालाब योजना की जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत किसानों को स्वयं की भूमि में तालाब निर्मित कराने के लिए आवेदन मंगाए जा रहे है। जिसके आधार पर जिला प्रशासन द्वारा चिन्हित स्थान का चिन्हांकन कर तालाब निर्माण हेतु मनरेगा के माध्यम से तालाब के उत्खनन का कार्य प्रारंभ हो सकेगा। कार्यशाला में आयोजित तकनीकी सत्रों के अंतर्गत प्रवीण पाठक द्वारा नदी पुनर्जीवन और जन सहभागिता विषय पर अपना विषय रखते हुए नदी पुनर्जीवन के चार आयाम नदी सदानीरा, नदी स्वच्छता, नदी सुपोषण और नदी श्रद्धा पर अपनी बात रखी।
