भोपाल। 7 मई को हुई मॉकड्रिल के दौरान शहर में कई ऐसे क्षेत्र थे जहाँ पर सायरन सुनाई नहीं दिया था। जिसके कारण लोगों को ब्लैकआउट कब शरू हुये और कब खत्म यह समझने में काफी परेशानी हुई थी. दरअसल युद्ध और आपत्कालीन स्थिति में लोगों को सतर्क करने के लिए भोपाल में लगा सायरन सिस्टम काफी पुराना हो गया है और नए लगे सायरन राजधानी के प्रमुख स्थानों और बाजारों में लगाया जाएगा। इसका पूरा कंट्रोल प्रशासन के पास होगा। यह सिस्टम कंट्रोल एंड कमांड सेंटर से जुड़ा रहेगा
कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने बताया कि इस पर पुलिस कमिश्नर से बैठक कर जल्द निर्णय होगा। गौरतलब है कि भोपाल में 1971 में पाक से युद्ध के समय लगाया गया सायरन सिस्टम लगभग खऱाब हो चुका है। नया लगने वाला सायरन सिस्टम पूरे शहर में एक साथ ऑपरेट हो सकेगा। जिससे शहर के लोगों को एक साथ आपातकालीन स्थिति की जानकारी मिल जाएगी। सायरन सिस्टम के बारे में लोगों को जागरुक करने के लिए अभियान चलाया जाएगा।स्कूल-कॉलेज में छात्र-छात्राओं को सायरन का मतलब और व्यवहार की जानकारी दी जाएगी। मॉक ड्रिल में कई जगह लाइट बंद नहीं हुई। इसलिए सिस्टम को और बेहतर बनाया जाएगा।
