नयी दिल्ली (वार्ता) आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) इंफ्रास्ट्रक्चर की मांग बढ़ने के साथ किफायती लागत , नवीकरणलीय ऊर्जा पर जोर और डेटा सेंटर के विकास के लिए एक रणनीतिक स्थान बनने के साथ ही वर्ष 2030 तक एआई की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए 4 से 5 करोड़ वर्ग फुट रियल एस्टेट और 40 से 45 टेरावॉट बिजली की जरूरत होगी।
डेलॉयट इंडिया द्वारा आज जारी एक रिपोर्ट में यह बात कही गयी है। इसमें कहा गया है कि भारत को वैश्विक एआई हब के रूप में स्थापित करने के लिए विशेष नीतिगत फैसले अहम होंगे। रिपोर्ट में विश्व में अग्रणी एआई रेडी ईकोसिस्टम के निर्माण के लिए भारत के लिए छह प्रमुख स्तंभो की पहचान की है। ये स्तंभ हैं रियल एस्टेट, बिजली, यूटिलिटीज इंफ्रास्ट्रक्चर, कनेक्टिविटी, नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर, कंप्यूट इंफ्रास्ट्रक्चर, टैलेंट और पॉलिसी फ्रेमर्वक।
डेलॉयट इंडिया के पार्टनर एस अंजनी कुमार ने कहा, “ अगर भारत अपनी एआई क्षमताओं को बढ़ाना और इससे जुडी अपनी क्षमताओं को जानना चाहता है, तो इस क्षेत्र को समर्थन देने के लिए बेहतर नीतियाें की जरूरत होगी। डेटा एनालिटिक्स और प्रोसेसिंग की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए भारत को अपना एआई-रेडी इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करना चाहिए। इसके अलावा शोध एवं विकास ( आर एंड डी) को मजबूत करने, टैलेंट में सुधार, स्थानीय डेटासेट और इससे जुडी नीतियों को सुरक्षित करने से एआई आधारित विकास में और तेजी आएगी। विकास और निवेश से जुडे प्रमुख क्षेत्रों पर ध्यान देकर और मजबूत निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा देकर, भारत वैश्विक एआई ईकोसिस्टम लीडर के तौर पर अपनी स्थिति को मजबूत कर सकता है।”
