स्मृति ईरानी ने बताया ‘गुड टच-बैड टच’ पर बात करना है जरूरी

मुंबई, (वार्ता) पूर्व केन्द्रीय मंत्री और अभिनेत्री स्मृति ईरानी ने बताया है ‘गुड टच-बैड टच’ पर बात करना जरूरी है।

सालों से, स्टार प्लस ने ड्रामे, इमोशन और कभी न भूलने वाले ट्विस्ट से भरी कहानियों के साथ दर्शकों को बांधे रखा है। इसके सबसे आइकॉनिक शोज में ‘क्यूंकि सास भी कभी बहू थी’ का नाम सबसे ऊपर आता है, जो सिर्फ एक फैमिली ड्रामा ही नहीं है, बल्कि एक ऐसा शो है जिसने लगातार अपने प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल जरूरी सोशल इश्यूज को दिखाने और उन पर सार्थक बातचीत शुरू करने के लिए किया है।

हाल ही के स्टोरीलाइन में, तुलसी को परी की बेटी गरिमा के साथ उसके दर्दनाक किडनैपिंग के बाद एक दिल छू लेने वाली और जरूरी बातचीत करते हुए देखा गया है। इस घटना को नजरअंदाज करने के बजाय, तुलसी धीरे से उसका सामना करती है, उससे पूछती है कि क्या हुआ था और ‘गुड टच’ और ‘बैड टच’ के बीच का फर्क समझाती है। इससे भी ज्यादा जरूरी बात यह है कि वह बच्ची को बोलने के लिए प्रोत्साहित करती है और उसे याद दिलाती है कि चाहे कुछ भी हो, उसकी आवाज मायने रखती है और उसकी सुरक्षा सबसे पहले आती है।

इस शो की कहानियों के जरिए बदलाव लाने और जागरूकता पैदा करने पर बात करते हुए स्मृति ईरानी ने साझा किया, “जब हम ‘क्यूंकि’ की विरासत को आपके टेलीविजन स्क्रीन पर वापस लाए, तो यह सिर्फ एक कमबैक नहीं था। यह एक कमिटमेंट था। बदलाव की बात करने का एक वादा था। उम्मीद को थामे रखने का वादा। उन कहानियों को बताने के लिए जिनके बारे में अक्सर फुसफुसाहट तो होती है, लेकिन उनका सामना शायद ही कभी किया जाता है। हमने घरेलू हिंसा के बारे में बात की। हमने उम्र बढ़ने (एजिंग) पर बातचीत शुरू की। हमने आर्थिक स्वतंत्रता के लिए महिलाओं के अधिकारों का समर्थन किया।”

स्मृति ईरानी ने बताया कि शो के लिए बच्चों की सुरक्षा पर इतनी सीधी बात करना क्यों जरूरी था। उन्होंने साझा किया, “और कल, हमने उस चीज़ के बारे में बात करने की हिम्मत जुटाई जो अनगिनत घरों के अंदर के सन्नाटे को तोड़ देती है चाइल्ड सेफ्टी। मेलोड्रामा के पर्दे के पीछे एक ऐसी सच्चाई छिपी थी जिसे नजरअंदाज करना नामुमकिन था: हमारे बच्चों को ‘गुड टच’ और ‘बैड टच’ के बीच का फर्क पता होना चाहिए। उन्हें पता होना चाहिए कि उनकी आवाज़ मायने रखती है। उन्हें पता होना चाहिए कि उनकी सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता।”

मेनस्ट्रीम टेलीविजन पर इतने संवेदनशील विषय को दिखाने के इमोशनल वजन पर बात करते हुए, स्मृति ईरानी ने माना कि ऐसी कहानियां सुनाना असहज करने वाला होता है, लेकिन इसके साथ जिम्मेदारी भी आती है। स्मृति ने कहा, “ये कहानियां सुनाना आसान नहीं है। ये असहज करती हैं। ये दर्दनाक हैं। लेकिन ये जरूरी हैं। हमने इन्हें सुनाने की ताकत इसलिए जुटाई क्योंकि आप देख रहे थे। क्योंकि आपने सुना। क्योंकि आपको परवाह थी। और जब तक आप हमारे साथ खड़े हैं, हम सीमाओं को आगे बढ़ाते रहेंगे, सन्नाटे पर सवाल उठाएंगे और बदलाव की लहर लाएंगे। क्योंकि ये सिर्फ स्क्रीन पर दिखने वाली कहानियां नहीं हैं। ये आपकी कहानियां हैं। हमारी कहानियां हैं। ऐसी कहानियां जो एक सुरक्षित भविष्य बनाने में मदद कर सकती हैं।”

‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ हर रोज रात 10:30 बजे, सिर्फ स्टार प्लस पर प्रसारित होता है।

 

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