
इंदौर. प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल ने चिकित्सा व्यवस्था के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक छलांग लगाई है. इम्यूनो हेमेटोलॉजी एवं ब्लड ट्रांसफ्यूजन विभाग में अत्याधुनिक रोटेम डेल्टा विस्कोइलास्टिक मशीन का शुभारंभ किया गया है.
यह मशीन न केवल एमवाय अस्पताल में पहली बार स्थापित की गई है, बल्कि समूचे मध्यप्रदेश के किसी भी शासकीय या निजी अस्पताल में अभी तक यह तकनीक उपलब्ध नहीं थी. इस उपलब्धि से न केवल एमवाय की क्षमताओं में वृद्धि होगी, वरन पूरे राज्य के लिए चिकित्सा नवाचार की दिशा में मील का पत्थर भी सिद्ध होगी. इस मशीन का उपयोग थक्का बनने की प्रक्रिया को सही समय पर डायग्नोस्ट करने के लिए किया जाएगा. विशेष रूप से सर्जरी, ट्रॉमा, सेप्सिस, लिवर फेलियर, प्रसव संबंधी जटिलताओं जैसी स्थितियों में यह मशीन जीवन रक्षक भूमिका निभाएगी. विभागाध्यक्ष एवं अस्पताल अधीक्षक डॉ. अशोक यादव ने बताया कि नव भारत को बताया कि रोटेशनल थ्रोम्बोएलास्टोमेट्री तकनीक से लैस यह मशीन ट्रॉमा इंड्यूस्ड कोगुलोपैथी के मूल्यांकन और उपचार में मदद करती है. इससे जटिल केसों में भी रक्तस्त्राव की सटीक जांच और त्वरित इलाज संभव होगा. इस अवसर पर मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. अरविंद घंघोरिया ने कहा एमवाय को उत्कृष्ट बनाने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है. हमारा उद्देश्य मरीजों को विश्वस्तरीय चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना है, जिससे न केवल समय की बचत हो, बल्कि उनका इलाज भी पहले से कहीं बेहतर हो सके. इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में क्षेत्रीय विधायक गोलू शुक्ला और सांसद शंकर लालवानी विशेष रुप से उपस्थित थे.
