भारत-ईएफटीए समझौता बुधवार से लागू; यूरोप के चार देश 15 वर्ष में करेंगे 100 अरब डॉलर का निवेश

नयी दिल्ली, 30 सितंबर (वार्ता) भारत और चार सदस्यीय यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (ईएफटीए) के साथ बुधवार से प्रभावी होने जा रहा व्यापार और आर्थिक भागीदारी समझौता (टेपा) न केवल यूरोप के चार विकसित देशों के साथ वस्तुओं और सेवाओं के कारोबार को शुल्क और अन्य बाधाओं से मुक्त करने का समझौता है बल्कि इसके तहत इन देशों से भारत में 15 वर्ष में 100 अरब डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता भी जुड़ी है।

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने मंगलवार को एक विज्ञप्ति में कहा कि स्विट्जरलैंड, नॉर्वे, लिकटेंस्टीन और आइसलैंड की सदस्यता वाले ईएफटीए के साथ यह एक ऐतिहासिक समझौता है वस्तुओं और सेवाओं के लिए बाज़ार पहुंच को बढ़ाने वाला, बौद्धिक संपदा अधिकारों को मज़बूत करने और मेक इन इंडिया तथा आत्मनिर्भर भारत पहलों का समर्थन करते हुए सतत, समावेशी विकास को बढ़ावा देने वाला समझौता है।

विज्ञप्ति में कहा गया है कि इन देशों से 15 वर्षों में 100 अरब बिडॉलर के निवेश आने और इससे 10 लाख प्रत्यक्ष रोज़गार के अवसर पैदा करने की संभावना है।

सरकार ने नवीकरणीय ऊर्जा, जीवन विज्ञान, इंजीनियरिंग और डिजिटल परिवर्तन में ईएफटीए निवेश की सुगमता के लिए भारत-ईएफटीए डेस्क चालू किया है। यह एकल-खिड़की मंच के रूप में काम करेगा ताकि संयुक्त उद्यमों, देनों पक्षों के छोटे मझोले उद्यमों के बीच सहयोग और प्रौद्योगिकी साझेदारी को बढ़ावा दिया जा सके। मंत्रालय का कहना है कि यहएक ‘आदर्श समझौता’ है और ईएफटीए के साथ एक मजबूत भविष्य के निर्माण के लिए भारत की तत्परता की पुष्टि करता है।

इस समझौते पर पिछले साल 10 मार्च को नये दिल्ली में हस्ताक्षर किये गये थे। इसमें 14 अध्याय हैं, जो मुख्य रूप से वस्तु बाज़ार में प्रवेश, उत्पत्ति के नियम, व्यापार सुगमता, व्यापार उपाय, स्वच्छता और पादप स्वच्छता उपाय, व्यापार में तकनीकी बाधायें, निवेश प्रोत्साहन, सेवाओं पर बाज़ार में प्रवेश, बौद्धिक संपदा अधिकार, व्यापार और सतत विकास तथा अन्य कानूनी और क्षैतिज प्रावधानों पर ध्यान केंद्रित किया गया है।

इसमें शत-प्रतिशत गैर-कृषि उत्पादों और प्रसंस्कृत कृषि उत्पादों पर आयात शुल्क में घटाने या समाप्त करने के प्रावधान शामिल हैं। मंत्रालय का कहना है कि फार्मा, चिकित्सा उपकरण और प्रसंस्कृत खाद्य आदि क्षेत्रों में भारत की ओर से बाजार पेशकश करते हुए उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) से संबंधित संवेदनशीलता को ध्यान में रखा गया है।

निवेश और रोजगार प्रतिबद्धताओं से जुड़े टेपा के अनुच्छेद 7.1 के अनुसार, ईएफटीए के सदस्य देश 10 वर्ष में भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) में 50 अरब डॉलर तक की वृद्धि करेंगे और उसके बाद के पांच वर्षों में और 50 अरब डॉलर तक का एफडीआई लायेंगे।

ईएफटीए देशों ने व्यापारिक वस्तुओं की सूची की 92.2 प्रतिशत वस्तुओं शुल्क में रियायत की है जो वहां भारत से होने वाली 99.6 प्रतिशत वस्तुओं पर लागू होगा। भारत के सभी प्रकार के गैर-कृषि उत्पादों और प्रसंस्कृत कृषि उत्पादों (पीएपी) को ईएफटीए के बार में शुल्क संबंधी रियायतें मिलेंगी।

भारत ने निर्यात की जाने वाली विभिन्न प्रकार की 82.7 प्रतिशत वस्तुओं पर रियायत देगा, जो ईएफटीए के निर्यात वाली 95.3 प्रतिशत वस्तुओं को शामिल करेगा। ईएफटीए देशों से भारत के आयात में 80 प्रतिशत से अधिक सोना है, और सोने पर प्रभावी शुल्क में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

वाणिज्य मंत्रालय ने कहा है कि भारत ने अपने संवेदनशील क्षेत्रों को संरक्षित किया गया है, जिनमें फार्मा, चिकित्सा उपकरण, प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ, डेयरी, सोया, कोयला और संवेदनशील कृषि उत्पाद शामिल हैं।

सेवा क्षेत्र में नर्सिंग, चार्टर्ड अकाउंटेंसी और वास्तुकला जैसी व्यावसायिक सेवाओं में पारस्परिक मान्यता समझौतों का प्रावधान है और इसमें सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी), व्यावसायिक सेवाओं, सांस्कृतिक और मनोरंजक सेवाओं, शिक्षा और आडियो-वीजुल (दृश्य-श्रव्य) सेवाओं में बेहतर अवसर प्रदान करता है।

मंत्रालय का दावा है कि इसमें जेनेरिक दवाओं में भारत के हितों की रखा की गयी है और पेटेंट को हमेशा बढ़ाते रहने से संबंधित चिंताओं का पूरी तरह से समाधान किया गया है।

बयान में कहा गया है कि यह समझौता अगले 15 वर्षों में भारत के युवा आकांक्षी कार्यबल के लिए बड़ी संख्या में प्रत्यक्ष नौकरियों के सृजन में तेजी लाएगा, जिसमें व्यावसायिक और तकनीकी प्रशिक्षण के लिए बेहतर सुविधायें शामिल हैं। ईएफटीए की पेशकश के तहत शुल्क वर्गीकरण की दृष्टि से वस्तुओं की 92 प्रतिशत श्रेणियों को शामिल किया जाएगा। इससे मशीनरी, कार्बनिक रसायन, वस्त्र और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों जैसे क्षेत्रों में भारतीय निर्यातकों को ईएफटीए के बाजारों में अच्छे अवसर मिलेंगे।

 

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