चेंबर आवंटन याचिका पर HC का हस्तक्षेप से इनकार

सीधी।

नगर पालिका परिषद सीधी के उपाध्यक्ष दान बहादुर सिंह द्वारा विगत माह उनको नगर पालिका में बैठने के लिए बनाई गई अस्थाई व्यवस्था वाले कक्ष को खाली करा लेने के उपरांत उन्हें चैंबर आवंटन कराए जाने को लेकर हाई कोर्ट जबलपुर में एक याचिका दायर की गई थी। हाई कोर्ट द्वारा दायर की गई याचिका की सुनवाई करने के पश्चात न्यायालय ने याचिकाकर्ता के दावे को विधि सम्मत नहीं पाए जाने पर उस पर हस्तक्षेप करने से इन्कार कर दिया है।

क्या था मामला

दरअसल, मामला यह था कि नगर पालिका परिषद सीधी के उपाध्यक्ष दान बहादुर सिंह चौहान को विगत कुछ माह पूर्व नगर पालिका परिषद सीधी के भवन में उनके लिए बैठने के लिए बनाई गई अस्थाई व्यवस्था वाले कक्ष में उनके द्वारा ताला लगाकर बंद किए जाने को लेकर उन्हें नोटिस देकर खाली करने के लिए कहा गया था जिस पर तय समय सीमा में उनके द्वारा जब कक्ष का ताला नहीं खोला गया तो नगर पालिका के पार्षदों, स्टाफ और मीडिया के सामने उस कक्ष का ताला तोड़कर उसको खाली किये जाने की प्रक्रिया को अंजाम दिया गया था।

इसी मामले को लेकर नगर पालिका उपाध्यक्ष दान बहादुर सिंह द्वारा भारतीय संविधान अनुच्छेद 226 के तहत याचिका दायर की थी जिसमें अनुलग्नक पी/ 2और पी / 3 में निहित 17 फरवरी 2025 के आदेश को चुनौती दी गई थी कि पुरानी बिल्डिंग नगर पालिका परिषद सीधी में कक्ष नंबर 26 को जिला शहरी विकास प्राधिकरण कार्यालय को आवंटित किया गया था। याचिकाकर्ता ने ये आरोप लगाया था कि उनके अनुपस्थिति में कक्ष क्रमांक 26 का ताला तोड़कर अपने कब्जे में लिया गया और नगर परिषद द्वारा मनमानी और दुर्भावना पूर्णआदेश पारित किया गया। इस बात को आधार बनाते हुए उन्होंने मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय जबलपुर में 22 अप्रैल 2025 को नगर परिषद प्रशासन के विरुद्ध एक याचिका लगाते हुए न्यायालय से हस्तक्षेप करने की अपील की गई थी।

याचिका कर्ता के वकील ने दलील पेश की थी कि आदेश दुर्भावना से पारित किया गया है याचिकाकर्ता ने नगर पालिका अध्यक्ष को ऋण दिया था। अध्यक्ष पैसे वापस नहीं कर रहे थे। याचिकाकर्ता ने शिकायत दर्ज कराई है, इसलिए उसके खिलाफ दुर्भावना से आदेश पारित किया गया है। डीयूडीए का कार्यालय विकास भवन में दूसरी मंजिल पर है, इन परिस्थितियों में आदेश में हस्तक्षेप किया जा सकता है और उसे रद्द किया जा सकता है।

वहीं याचिका कर्ता के विरुद्ध नगर परिषद की ओर से उपस्थित अधिवक्ता ने कहा कि आदेश पूरी तरह से प्रशासनिक प्रकृति का है।

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