उज्जैन: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के गृह नगर उज्जैन में विक्रम उद्योगपुरी लिमिटेड औद्योगिक प्रकल्प अब मील का पत्थर साबित हो रहा है. यह क्षेत्र अब धार जिले के पीथमपुर की तर्ज पर तेजी से विकसित हो रहा है, जिसने उज्जैन की आर्थिक और सामाजिक दशा बदलने का काम शुरू कर दिया है. यहां उद्योगपुरी में पेप्सीको अपना प्रोडक्शन शुरू करने वाला है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2 अक्टूबर 2023 में ग्वालियर के एक आयोजन से वर्चुअल तौर पर विक्रम उद्योगपुरी में उद्योग स्थापित करने के लिए उद्घाटन किया था, तब से लगातार न केवल देश भर से, बल्कि विदेशों से भी बड़ा निवेश उज्जैन विक्रम उद्योग पुरी की तरफ आकर्षित हो रहा है. इसी क्रम में, वैश्विक खाद्य और पेय पदार्थ की दिग्गज कंपनी पेप्सिको भी अब अपना प्रोडक्शन प्लांट शुरू करने जा रही है, जिसकी तैयारियां जोरों पर चल रही है.
उद्योगपुरी में ये 8वाँ प्लांट
यह नया पेप्सिको प्लांट विक्रम उद्योगपुरी में जमीन लेने के बाद धरातल पर उतरने वाला आठवाँ बड़ा उद्योग है. कंपनी द्वारा कुल निवेश 1,266 करोड का किया गया है. कुल मिलाकर 70 से ज्यादा उद्योग यहां पर आकार लेने वाले हैं ,व 40 प्रस्तावित है. धीरे-धीरे नामचीन कई सारी कंपनियां जमीन लेने के बाद स्ट्रख्र तैयार कर रही है.
पेय पदार्थों के निर्माण में उपयोग
पेप्सिको कंपनी पेय पदार्थ के निर्माण में उपयोग होने वाला फार्मूला तैयार करेगी जिसमें रोजगार सृजन होगा, लगभग 1,000 लोगों को रोजगार दिया जाएगा. कंपनी का कोल्ड स्टोरेज गाँव रामगढ़ में रहेगा,जो तहसील घट्टिया के अंतर्गत आता है.
मार्च 26 में होगा प्लांट शुरू
पेप्सिको का यह संयंत्र स्थायित्व, नवीकरणीय ऊर्जा और उच्च जल दक्षता पर केंद्रित होगा, जो इसे एक आधुनिक और पर्यावरण-अनुकूल सुविधा बनाएगा. यह भारत में पेप्सिको का दूसरा फ्लेवर कॉन्सेंट्रेट प्लांट होगा। कंपनी ने तैयारी शुरू कर दी है मार्च 2026 में प्लांट शुरू हो जाएगा.
एमपीआईडीसी निदेशक से चर्चा
नवभारत से चर्चा में एमपीआईडीसी के कार्यकारी निदेशक राजेश राठौड़ ने बताया कि मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव का विजन एकदम क्लियर है, जिसमें धर्म नगरी को उद्योग नगरी के तौर पर भी पहचान मिले , 1,000 से लेकर 5,000 की संख्या में बेरोजगार युवाओं को यहां रोजगार मिल रहा है. इस औद्योगिक उछाल का सबसे बड़ा लाभ उज्जैन के युवाओं को मिल रहा है. इंजीनियर और अन्य पेशेवर डिग्री हासिल करने के बाद उज्जैन के युवाओं को अब नौकरी के लिए देश के अन्य राज्यों या विदेशों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा. उन्हें महाकाल की नगरी में ही नौकरी मिलने लगी है, जिससे उनका पलायन थम गया है.
