60 मेगावाट सोलर प्लांट का शुभारंभ मुख्यमंत्री करेंगे कल, देश के लिए बना मॉडल

इंदौर। स्वच्छता में देश भर में अपनी पहचान स्थापित कर चुके इंदौर ने अब ऊर्जा के क्षेत्र में भी बड़ा और दूरदर्शी कदम उठाया है। इंदौर नगर निगम द्वारा विकसित 60 मेगावाट क्षमता के सोलर पावर प्लांट का अधिकृत शुभारंभ मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के कर कमलों से होने जा रहा है, जो देश में किसी भी शहरी निकाय द्वारा स्थापित सबसे बड़ी सौर परियोजनाओं में शामिल है। यह परियोजना मध्य प्रदेश के खरगोन जिले के समराज और आशुखेड़ी गांवों में स्थापित की गई है।

*ऊर्जा खर्च से राहत, सोलर बना स्थायी समाधान*

नगर निगम के जालूद और भकलई जल पंपिंग स्टेशनों पर अब तक हर महीने 22 से 24 करोड़ रुपये तक का बिजली खर्च आता रहा है। इस बढ़ते वित्तीय दबाव को देखते हुए निगम ने दीर्घकालिक समाधान के रूप में सौर ऊर्जा को अपनाया। इस परियोजना से अब जल आपूर्ति तंत्र को सस्ती, स्थिर और स्वच्छ बिजली उपलब्ध होगी।परियोजना के लिए इंदौर नगर पालिक निगम ने 244 करोड़ के ग्रीन बॉन्ड जारी किए 41.28 करोड़ की वायबिलिटी गैप फंडिंग (VGF) प्राप्त की 20 करोड़ की ब्याज सब्सिडी हासिल की यह परियोजना नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की CPSU फेज-II योजना के तहत विकसित की गई है।

*राष्ट्रीय ऊर्जा लक्ष्यों में योगदान*

इंदौर का यह प्रोजेक्ट भारत के 2070 तक ‘नेट जीरो’ उत्सर्जन लक्ष्य और 2030 तक 500 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता हासिल करने के लक्ष्य से सीधे जुड़ा हुआ है। यह परियोजना शहरी भारत में ऊर्जा संक्रमण का मजबूत उदाहरण बनकर उभरी है।

*तकनीकी रूप से अत्याधुनिक परियोजना*

*कुल भूमि* 210.84 एकड़ (बंजर भूमि का उपयोग)

*स्थापित क्षमता* 60 मेगावाट (AC)

*सोलर तकनीक* DCR-अनुपालन Mono-PERC मॉड्यूल

*ग्रिड कनेक्टिविटी* 132 केवी पूलिंग स्टेशन (MPPTCL)

*वार्षिक उत्पादन* लगभग 9.6 करोड़ यूनिट (MU)

यह ऊर्जा सीधे शहर के जल पंपिंग सिस्टम को सपोर्ट करेगी, जिससे बिजली लागत में भारी कमी आएगी।

 

*पर्यावरणीय दृष्टि से बड़ा प्रभाव*

– हर वर्ष लगभग 1.46 लाख टन CO₂ उत्सर्जन में कमी

– शून्य उत्सर्जन आधारित संचालन

परियोजना क्षेत्र में हरित पट्टी विकास और पौधरोपण

– 10 किमी दायरे में कोई संरक्षित वन या वन्यजीव प्रभावित नहीं

यह परियोजना पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के संतुलन का उत्कृष्ट उदाहरण है।

*जल संरक्षण में भी अभिनव पहल*

सोलर पैनलों की सफाई के लिए

उपचारित पानी और नर्मदा जल का उपयोग और रोबोटिक एवं ड्राई क्लीनिंग तकनीक इन उपायों से जल की न्यूनतम खपत सुनिश्चित की गई है, जो इसे जल संरक्षण का भी राष्ट्रीय मॉडल बनाता है।

*स्थानीय सहभागिता से मिली मजबूती*

परियोजना के विकास में स्थानीय ग्राम पंचायतों की सक्रिय भागीदारी रही।

*पूर्व और पश्चात विस्तृत जनसंवाद*

स्थानीय रोजगार को प्राथमिकता

पेयजल स्रोतों के संरक्षण की लिखित सहमति सड़क सुधार, स्वास्थ्य शिविर और सोलर स्ट्रीट लाइट जैसी CSR गतिविधियाँ

इन प्रयासों ने परियोजना को सामाजिक स्वीकृति और स्थायित्व प्रदान किया।

*आर्थिक लाभ* मजबूत होगा नगर निगम

*सोलर बिजली लागत* लगभग 3.5 प्रति यूनिट

*ग्रिड बिजली लागत* 6 से ₹9 प्रति यूनिट

इस अंतर से जल संचालन में करोड़ों रुपये की बचत होगी।

साथ ही 25 वर्षों तक स्थिर ऊर्जा लागत

*कम संचालन एवं रखरखाव खर्च*

कार्बन क्रेडिट से अतिरिक्त आय

यह सभी कारक इंदौर को आर्थिक रूप से अधिक आत्मनिर्भर बनाएंगे।

*महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा*

“यह परियोजना केवल बिजली उत्पादन नहीं, बल्कि इंदौर की आत्मनिर्भरता और सतत विकास का प्रतीक है। यह देश के अन्य शहरों के लिए मार्गदर्शक बनेगी।”

*मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा*

“इंदौर का यह सोलर मॉडल प्रदेश और देश के लिए आदर्श है, जो ऊर्जा सुरक्षा, जल संरक्षण और रोजगार सृजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।”

*नगर विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा*

“इंदौर का 60 मेगावाट सोलर प्रोजेक्ट केवल एक ऊर्जा परियोजना नहीं, बल्कि पूरे देश के शहरी विकास मॉडल के लिए मार्गदर्शक है। जिस तरह इंदौर ने स्वच्छता में देश को दिशा दी, उसी तरह अब स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में भी यह शहर नई मिसाल कायम कर रहा है।

*उद्देश्य*

जल पंपिंग की बिजली लागत में कमी और स्वच्छ ऊर्जा अपनाना

*क्षमता*

60 मेगावाट | 210.84 एकड़ भूमि

*उत्पादन*

9.6 करोड़ यूनिट प्रतिवर्ष

*पर्यावरण लाभ*

1.46 लाख टन CO₂ उत्सर्जन में कमी

*आर्थिक लाभ*

₹3.5/यूनिट सोलर बिजली 25 वर्षों तक स्थिर लागत

इंदौर का 60 मेगावाट सोलर प्लांट केवल एक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि शहरी भारत के भविष्य की रूपरेखा है जहां स्वच्छ ऊर्जा, आर्थिक संतुलन और पर्यावरणीय जिम्मेदारी एक साथ आगे बढ़ते हैं।

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